व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी
Friday, 22 May 2026
गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छोर वाली पाग पर क़तरा के श्रृंगार
आज के मनोरथ
राजभोग में कमल की मंडली
शाम को खेलत में काको गुसैया
राजभोग दर्शन –
साज – (राग : सारंग)
लालन पहिरत है नवचंदन l
विविध सुगंध मिलाय अरगजा व्रजयुवतिन मनफंदन ll 1 ll
शीतल मंद बहत मलयानिल मोहन मन को रंजन l
अंग अंग छबि कहा लों वरनो मनमथ मनके गंजन ll 2 ll
आरत चित विलोकत हरिमुख चपल चलन दृग खंजन l
‘गोविंद’ प्रभुपिय सदा बसो जिय गिरिधर विरह निकंदन ll 3 ll
साज – आज श्रीजी में गेंद खेलने के चित्राम वाली पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.
वस्त्र – आज प्रभु को गुलाबी मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं.
श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है.
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की छोर वाली पाग पर क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.