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Saturday, 23 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमीSunday, 24 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमी
Sunday, 24 May 2026

केसरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार 

आज के मनोरथ 

राजभोग में नंदमहोत्सव 
शाम को सांझी मनोरथ 

राजभोग दर्शन –

साज – (राग : सारंग)

लालन पहिरत है नवचंदन l
विविध सुगंध मिलाय अरगजा व्रजयुवतिन मनफंदन ll 1 ll
शीतल मंद बहत मलयानिल मोहन मन को रंजन l
अंग अंग छबि कहा लों वरनो मनमथ मनके गंजन ll 2 ll
आरत चित विलोकत हरिमुख चपल चलन दृग खंजन l
‘गोविंद’ प्रभुपिय सदा बसो जिय गिरिधर विरह निकंदन ll 3 ll 

साज – आज श्रीजी में श्री ठाकुरजी को पलना झुलाते नंद-यशोदा जी, नंदोत्सव एवं छठी पूजन के सुन्दर कलात्मक चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को केसरी मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की मोर-चंद्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक वनमाला धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते है.
पट व गोटी ऊष्णकाल के धराए जाते है.

Friday, 22 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी (सप्तमी क्षय)Saturday, 23 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी (सप्तमी क्षय)
Saturday, 23 May 2026

सुवापंखी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर गोल बाँकी चंद्रिका के श्रृंगार 

आज के मनोरथ 

राजभोग में अंगूर की मंडली 
शाम को कुंजन माँझ बिराजत मोहन 

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : सारंग)

तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l
समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि
तब ग्वालिन मंद मंद मुसिकानी ll 1 ll
वेही जल वैसे ही गयो ओर जल भर लाई
तब ग्वालिन बोली मधुर सी बानी l
‘चतुरबिहारी’ प्यारे प्यासे हो तो पीजिये
नातर सिधारो रावरे जु प्यास मैं जानी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराज जी की कन्दरा में विराजित श्री गुसांईजी के पुत्रों के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को सुवापंखी मलमल का आड़बंद धराया जाता है. आड़बंद रुपहली तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होता है परन्तु किनारी बाहर आंशिक ही दृश्य होती है अर्थात भीतर की ओर मोड़ दी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर सुवापंखी रंग की गोल पाग के  ऊपर सिरपैंच, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों एवं तुलसी की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है. 
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट ऊष्णकाल का गोटी हक़ीक की छोटी आती है.

Thursday, 21 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी Friday, 22 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी 
Friday, 22 May 2026

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छोर वाली पाग पर क़तरा के श्रृंगार 

आज के मनोरथ 

राजभोग में कमल की मंडली
शाम को खेलत में काको गुसैया

राजभोग दर्शन – 

साज – (राग : सारंग)

लालन पहिरत है नवचंदन l
विविध सुगंध मिलाय अरगजा व्रजयुवतिन मनफंदन ll 1 ll
शीतल मंद बहत मलयानिल मोहन मन को रंजन l
अंग अंग छबि कहा लों वरनो मनमथ मनके गंजन ll 2 ll
आरत चित विलोकत हरिमुख चपल चलन दृग खंजन l
‘गोविंद’ प्रभुपिय सदा बसो जिय गिरिधर विरह निकंदन ll 3 ll 

साज – आज श्रीजी में गेंद खेलने के चित्राम वाली पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज प्रभु को गुलाबी मलमल का पिछोड़ा धराया जाता हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की छोर वाली पाग पर क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. 
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
 पट ऊष्णकाल का व गोटी बाघ बकरी की आती है.

Wednesday, 20 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पंचमीThursday, 21 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी
Thursday, 21 May 2026

बादली मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर दोहरा क़तरा के श्रृंगार 

आज के मनोरथ 

राजभोग में माखन चोरी मनोरथ 
शाम को रंग महल

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

तेरे लाल मेरो माखन खायो l
भर दुपहरी देखि घर सूनो ढोरि ढंढोरि अबहि घरु आयो ll 1 ll
खोल किंवार पैठी मंदिरमे सब दधि अपने सखनि खवायो l
छीके हौ ते चढ़ी ऊखल पर अनभावत धरनी ढरकायो ll 2 ll
नित्यप्रति हानि कहां लो सहिये ऐ ढोटा जु भले ढंग लायो l
‘नंददास’ प्रभु तुम बरजो हो पूत अनोखो तैं हि जायो ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में माखनचोरी लीला के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित सुन्दर पिछवाई धरायी जाती है जिसमें कृष्ण-बलराम अपने मित्रों के साथ मल्लकाछ-टिपारा का श्रृंगार धराये माखन चोरी कर रहे हैं. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को बादली रंग की मलमल की गोल छोर वाली रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित परधनी धरायी जाती है.

शृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर बादली रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, दोहरा क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 

श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.

 श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

Tuesday, 19 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी Wednesday, 20 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी 
Wednesday, 20 May 2026

मोतिया मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार 

आज के मनोरथ-

राजभोग में शीशम का बंगला 
शाम को षट्ऋतु मनोरथ 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

 साज – आज श्रीजी में मोतिया (हल्के गुलाबी) मलमल की, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. 
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का आड़बंद धराया जायेगा

शृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर मोतिया(हल्के गुलाबी)  रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 

श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
 श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

Sunday, 17 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीयाMonday, 18 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया
Monday, 18 May 2026

श्वेत धोरा का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर श्वेत कुल्हे पर मोर चंद्रिका के जोड़ के शृंगार

आज के मनोरथ-

राजभोग में रथ बैठे गिरधारी आज माई 
शाम को पुष्प वितान 

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत 
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज श्वेत  मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज स्वेत धोरा का पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर रुपहली किनारी से सुसज्जित श्वेत कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, तीन मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.  श्रीकर्ण में हीरा के कुंडल धराये जाते हैं. 
रंग-बिरंगी पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं.
कली, कमल आदि सभी माला धरायी जाती है.

 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट श्वेत गोटी उष्णकाल की आती हैं.

Saturday, 16 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा Sunday, 17 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा 
Sunday, 17 May 2026

विशेष - आज से पुरुषोत्तम(अधिक )  मास शुरू हो रहा हे जो अधिक ज्येष्ठ के रूप में 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगा. श्रीजी को पूरे अधिक मास में विविध प्रकार के मनोरथ कर के रिझाया जाएगा.

केसरी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर केसरी कूल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ के श्रृंगार 

आज के मनोरथ-

साहेबान की मंडली 
मोगरा की कली के श्रृंगार 

राजभोग दर्शन -

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में केसरी मलमल की, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी गया है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.

वस्त्र – आज श्रीजी को केसरी मलमल की धोती एवं राजशाही पटका धराया गया है. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे के ऊपर तीन मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ धराये हैं.
श्रीकर्ण में कुंडल धराये हैं. कली आदि की माला धराई है. पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमुनी वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमीSunday, 24 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल नवमी Sunday, 24 May 2026 केसरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर केसरी कुल्हे पर तीन मोर चंद्रिका के जोड़ क...