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Monday, 17 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी Tuesday, 17 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी 
Tuesday, 17 August 2026

रूपहरी किनारी के धोरा के गुलाबी सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार 

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो. 
इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था. 

ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में लगभग छह बार धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के दिन निश्चित नहीं हैं.

ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी सोना के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत 
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज गुलाबी रंग की मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज गुलाबी रंग के धोरा का सुथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र मेघस्याम रंग के होते हैं.

शृंगार - ठाकुरजी को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण फ़िरोज़ा के छेड़ान के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर गुलाबी फेंटा का साज धराया जाता है जिसमें गुलाबी रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, फ़िरोज़ी मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट गुलाबी रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

Sunday, 16 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल पंचमीMonday, 17 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल पंचमी
Monday, 17 August 2026

श्रीनाथजी की उर्ध्व भुजा प्राकट्य दिवस की ख़ूब ख़ूब बधाई 

नागपंचमी

विशेष – आज नागपंचमी है. भारत देश के विभिन्न हिस्सों में नागपंचमी कई अलग-अलग दिनों पर मनाई जाती है. देश के कुछ भागों में नाग-पंचमी श्रावण कृष्ण पंचमी को भी मनायी जाती है. 

व्रज में आज नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है. 

श्रीजी में आज का उत्सव श्री गिरिराजजी के भाव से मनाया जाता है. पूर्ण प्राकट्य से पूर्व प्रभु श्रीजी श्री गिरीराजजी की कन्दरा में विराजित थे. 
विक्रम संवत 1465 की श्रावण शुक्ल पंचमी के दिवस श्रीजी को दूध अरोगाने गये व्रजवासियों को श्रीजी की उर्ध्व भुजा के दर्शन हुए थे. 
तब से सभी व्रजवासी उनके दर्शन कर दही, दूध आदि भोग रख उनकी आराधना करने लगे. आगामी 70 वर्षों तक व्रजवासियों ने इसी प्रकार प्रभु की उर्ध्वभुजा का पूजन किया. 

इसके पश्चात विक्रम संवत 1535 की चैत्र कृष्ण एकादशी को प्रभु का मुखारविंद प्रकट हुआ. 
श्री महाप्रभुजी ने विक्रम संवत 1549 में प्रभु को श्री गिरिराजजी की कन्दरा से बाहर पधराया एवं प्रभु की सेवा का कार्य अपने हाथ में लिया. तब तक सर्व व्रजवासी ही प्रभु को दूध, दही एवं मक्खन आदि का भोग रखते थे.

श्रीजी में विशेष – आज का उत्सव श्री गिरिराजजी के भाव से मनाया जाता है. आज की सेवा हंसाजी की ओर से की जाती है. 

श्रीजी को नियम से कोयली (सोसनी या गहरे नीले) रंग का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर पाग के ऊपर नागफणी का कतरा धराया जाता है.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में दही की पाटिया के लड्डू एवं पाटिया (गेहूं की सेवई) की खीर आरोगायी जाती है. 
सेव की खीर आज के अतिरिक्त केवल कुंडवारा मनोरथ में अथवा अन्नकूट उत्सव पर आरोगायी जाती है.

राजभोग दर्शन - 

कीर्तन – (राग : आशावरी)

देखो अद्भुत अवगति की गति, कैसो रूप धर्यो है हो l 
तीनलोक जाके उदर बसत है सो सूप कैं कोन पर्यो है हो ll 1 ll
जाकें नाल भये ब्रह्मादिक, सकल भोग व्रत साध्यो हो l 
ताको नाल छीनि ब्रजजुवती बोटि तगा सौं बांध्यो हो ll 2 ll
जिहिं मुख कौं समाधि सिव साधी आराधन ठहराने हो l
सोई मुख चूमति महरि जसोदा दूध लार लपटाने हो ll 3 ll
जिन श्रवननि गजकी बिपदा सुनी, गरुडासन तजी धावै हो l
तिन श्रवननि के निकट जसोदा हुलरावे अरु गावै हो ll 4 ll
जिन भुजबल प्रहलाद उबार्यो हिरनाकसिप उर फारे हो l
तेई भुज पकरि कहति व्रजनारी ठाड़े होहु लला रे हो ll 5 ll
विश्व-भरन-पोषन सब समरथ, माखन काज अरे है हो l
रूप विराट कोटि प्रति रोमनि, पलना मांझ परे हे हो ll 6 ll
सुरनर मुनि जाकौ ध्यान धरत है शंभु समाधिन टारी हो l
सोई ‘सूर’ प्रकट या ब्रजमें गोकुल गोप बिहारी हो ll 7 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराजजी की एक ओर आन्योर ग्राम एवं दूसरी ओर जतीपुरा ग्राम, दोनों ग्रामों से व्रजवासी श्रीजी की उर्ध्व भुजा के दर्शन करने जा रहे हैं ऐसे सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज कोयली रंग की मलमल का सुनहरी पठानी किनारी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) मध्यम श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व-आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर कोयली रंग की सुनहरी बाहर की खिड़की वाली छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, सुनहरी लूम तुर्री डाँख का जमाव का क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
 श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी थाग वाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीकंठ में कली की मालाजी  धरायी जाती हैं.
त्रवल नहीं धराए जाते हे बध्धी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, स्याम मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट कोयली व गोटी चांदी की आती है.

अनोसर में श्रीमस्तक पर धरायी पाग के ऊपर की सुनहरी खिड़की बड़ी कर के धरायी जाती है.

सुद तिथि नागपंचमी दिनदयाल दरस दीवो जोरे, जन्मदिवस जान बलदाऊ को मदनमोहन कृपा करी अतोरे.

Saturday, 15 August 2026

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थीSunday, 16 August 2026

व्रज - विस ८३ श्रावण शुक्ल चतुर्थी
Sunday, 16 August 2026

 विशेष – आज श्रीजी को नियम का दोहरा मल्लकाछ-टिपारा का श्रृंगार धराया जाता है. मल्लकाछ शब्द दो शब्दों (मल्ल एवं कच्छ) से बना है. ये एक विशेष परिधान है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं. यह श्रृंगार चंचल, चपल, पराक्रमी प्रभु को वीर-रस की भावना से धराया जाता है.

आज की सेवा श्री मन्मथमोदाजी के भाव से होती है अतः उपरोक्त श्रृंगार धराया जाता है.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

आज सखी देख कमलदल नैन l
शीश टिपारो जरद सुनेरी बाजत मधुरे बैन ll 1 ll
कतरा दोय मध्य चंद्रिका काछ सुनेरी रैन l
दादुर मोर पपैया बोले मोर मन भयो चैन ll 2 ll
नाचत मोर श्याम के आगे चलत चाल गज गैन l
श्रीविट्ठल गिरिधर पिय निरखत लज्जित भयो मैन ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराज-धारण की लीला के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. पिछवाई में श्री कृष्ण एवं बलदेव जी मल्लकाछ टिपारा के श्रृंगार में हैं एवं ग्वाल-बाल व गायें संग खड़ी हैं. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज एक आगे का पटका लाल पिली चूंदड़ी का एवं मल्लकाछ तथा दूसरा कंदराजी का स्याम सफ़ेद चूंदड़ी का पटका तथा मल्लकाछ धराया जाता है. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज श्रीकंठ का शृंगार छेड़ान (कमर तक) का एवं बाक़ी शृंगार भारी धराया जाता है. हरे मीना के सर्वआभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर टिपारा का साज धराया जाता है जिसमें लाल रंग की एकदानी चूंदड़ी के टिपारा के ऊपर मध्य में मोरशिखा, दोनों ओर दोहरे कतरा और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. चोटी नहीं धरायी जाती है. श्रीकंठ में कमल माला धरायी जाती है. गुलाबी एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, स्वर्ण के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं. पट लाल व गोटी चांदी की बाघ-बकरी की आती है.

Friday, 14 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)Saturday, 15 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)
Saturday, 15 August 2026

ठकुरानी तीज

सभी वैष्णवों को ठकुरानी तीज की बधाई

आज से श्रीजी को चूंदड़ी के वस्त्र धराने आरम्भ होते हैं.

वस्त्रों में आज नियम का लाल रंग का चौफूली चूंदड़ी का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर पाग व मोर-चंद्रिका का श्रृंगार धराया जाता है.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में प्रभु को चारोली (चिरोंजी) के लड्डू और दूधघर में सिद्ध केशरयुक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

सारी मेरी भींजत है जु नई अब ही पीहर से पहने जु आयी पिता वृषभानु दई ।
सुन्दर श्याम जायेगो ये रंग बहु विध चित्र दई ।।१।।
अपनो पीताम्बर मोहे ओढ़ावो बरखा उदित भई ।
कुम्भनदास लाल गिरधरनवर मुदित उछंग लई ।।२।।

साज – श्रीजी में आज लाल रंग की चौफूली चूंदड़ी की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – आज प्रभु को लाल रंग का चौफूली चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को वनमाला (चरणारविन्द तक) का उत्सव का भारी श्रृंगार धराया जाता है. 
मिलवा – हीरा, मोती, माणिक पन्ना एवं जड़ाव स्वर्ण के आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल चौफूली चूंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, सादी मोरपंख की चन्द्रिका और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में हीरा के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.
नीचे सात पदक ऊपर हीरा, पन्ना, माणक, मोती के हार व दुलडा धराया जाता हैं.
श्वेत एवं पीले पुष्पों की सुन्दर थाग वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का गोटी जड़ाऊ की आती है.
आरसी श्रृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

Thursday, 13 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल द्वितीया Friday, 14 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल द्वितीया 
Friday, 14 August 2026

लाल पीले लहरियाँ का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर कलगा (भीमसेनी क़तरा) के श्रृंगार

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

चल सखी देखन नंद किशोर l
श्रीराधाजु संग लीये बिहरत रुचिर कुंज घन सोर ll 1 ll
उमगी घटा चहुँ दिशतें बरखत है घनघोर l
तैसी लहलहातसों दामन पवन नचत अति जोर ll 2 ll
पीत वसन वनमाल श्याम के सारी सुरंग तनगोर l
जुग जुग केलि करो ‘परमानंद’ नैन सिरावत मोर ll 3 ll

साज – श्रीजी में आज लाल पीले लहरियाँ की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल पीले लहरियाँ का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र फ़िरोज़ी रंग के आते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटनों तक) श्रृंगार धराया जाता है. फ़ीरोज़ा के आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल पीले लहरियाँ के दुमाला के ऊपर सिरपैंच, कलगा (भीमसेनी कतरा) एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में लोलकबिंदी धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरियाँ के वेणुजी एवं दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं. 
पट लाल व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

Wednesday, 12 August 2026

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदाThursday, 13 August 2026

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदा
Thursday, 13 August 2026

हरे एवं सफ़ेद रंग के लहरिया का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा श्रृंगार

विशेष – आज की सेवा श्रीरंगा सखी की ओर से होती है एवं वस्त्र-श्रृंगार नियम का हरे-श्वेत लेहरिया का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर लहरियाँ की छज्जेदार पाग और जमाव (नागफणी) के कतरे का धराया जाता है. 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आशावरी)

गावो गावो मंगलचार वधावो नंदके l
आवो आँगन कलश साजिके दधिफूल नूतन डार ll 1 ll
उरसों उर मिलि नंदराय गोप सबै निहार l
मागध सुत बंदीजन मिलिके द्वार करत उच्चार ll 2 ll
पायो पूरन आसकरि सब मिलि देत असीस l
नंदरायको कुंवर लाडिलो जीओ कोटि बरीस ll 3 ll
तब व्रजराज आनंद मगन दीने बसन मंगाय l
ऐसी शोभा देखिके जन ‘सूरदास’ बलि जाय ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज हरे एवं श्वेत रंग के लहरिया की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. 
चरणचौकी, पडघा, बंटा आदि जड़ाव स्वर्ण के होते हैं. चांदी के पडघा के ऊपर माटी के कुंजे में शीतल सुगन्धित जल भरा होता है. दो गुलाबदानियाँ गुलाब-जल भर कर तकिया के पास रखी जाती हैं. सम्मुख में धरती पर त्रस्टी धरे जाते हैं. 

वस्त्र – श्रीजी को आज हरे एवं श्वेत रंग के लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं. कमल माला धरायी जाती है.
श्रीमस्तक पर हरे एवं श्वेत लहरिया की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, जमाव (नागफणी) का कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (झीने लहरिया व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी चांदी की छोटी आती है.

Tuesday, 11 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या Wednesday, 12 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या 
Wednesday, 12 August 2026

हरियाली अमावस्या 

आज के हिंडोलना के दर्शन 

आज चौक में हरे पत्तों की बिछावट एवं मुख्य द्वारों पर हरे तोरणों की सजावट की जाती है. 
संध्या-आरती में हिंडोलना भी हरे पत्तों के भारी खम्भों से कलात्मक रूप से सुसज्जित होता है.
 श्री मदनमोहन जी हरे पत्तों के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-यमन)

सोहत वन आयोरी सावंन हरियारो ।
हरित भूमि पर इद्रवघूसी राधिका सब सखियन संगलीने पहेरे कसुंभी सारी कंचन तन ।।१।।
रंगभर सुरंग हिंडोरे झुलत नव नागरी नागर मानों रंगरवे चल्यो हें अेडी अंगूरिन ।
सूरदास मदनमोहन पिय के गुण गावत ये सुख अति आनंद मगन मन ।।२।।

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी Tuesday, 17 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल षष्ठी  Tuesday, 17 August 2026 रूपहरी किनारी के धोरा के गुलाबी सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार  श्रीजी ने अपने ...