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Friday, 14 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)Saturday, 15 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)
Saturday, 15 August 2026

ठकुरानी तीज

सभी वैष्णवों को ठकुरानी तीज की बधाई

आज से श्रीजी को चूंदड़ी के वस्त्र धराने आरम्भ होते हैं.

वस्त्रों में आज नियम का लाल रंग का चौफूली चूंदड़ी का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर पाग व मोर-चंद्रिका का श्रृंगार धराया जाता है.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में प्रभु को चारोली (चिरोंजी) के लड्डू और दूधघर में सिद्ध केशरयुक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

सारी मेरी भींजत है जु नई अब ही पीहर से पहने जु आयी पिता वृषभानु दई ।
सुन्दर श्याम जायेगो ये रंग बहु विध चित्र दई ।।१।।
अपनो पीताम्बर मोहे ओढ़ावो बरखा उदित भई ।
कुम्भनदास लाल गिरधरनवर मुदित उछंग लई ।।२।।

साज – श्रीजी में आज लाल रंग की चौफूली चूंदड़ी की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – आज प्रभु को लाल रंग का चौफूली चूंदड़ी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को वनमाला (चरणारविन्द तक) का उत्सव का भारी श्रृंगार धराया जाता है. 
मिलवा – हीरा, मोती, माणिक पन्ना एवं जड़ाव स्वर्ण के आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल चौफूली चूंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, सादी मोरपंख की चन्द्रिका और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में हीरा के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. श्रीकंठ में कली,कस्तूरी आदि की माला आती हैं.
नीचे सात पदक ऊपर हीरा, पन्ना, माणक, मोती के हार व दुलडा धराया जाता हैं.
श्वेत एवं पीले पुष्पों की सुन्दर थाग वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का गोटी जड़ाऊ की आती है.
आरसी श्रृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

Thursday, 13 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल द्वितीया Friday, 14 August 2026

व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल द्वितीया 
Friday, 14 August 2026

लाल पीले लहरियाँ का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर कलगा (भीमसेनी क़तरा) के श्रृंगार

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

चल सखी देखन नंद किशोर l
श्रीराधाजु संग लीये बिहरत रुचिर कुंज घन सोर ll 1 ll
उमगी घटा चहुँ दिशतें बरखत है घनघोर l
तैसी लहलहातसों दामन पवन नचत अति जोर ll 2 ll
पीत वसन वनमाल श्याम के सारी सुरंग तनगोर l
जुग जुग केलि करो ‘परमानंद’ नैन सिरावत मोर ll 3 ll

साज – श्रीजी में आज लाल पीले लहरियाँ की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल पीले लहरियाँ का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र फ़िरोज़ी रंग के आते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटनों तक) श्रृंगार धराया जाता है. फ़ीरोज़ा के आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल पीले लहरियाँ के दुमाला के ऊपर सिरपैंच, कलगा (भीमसेनी कतरा) एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में लोलकबिंदी धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, लहरियाँ के वेणुजी एवं दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं. 
पट लाल व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

Wednesday, 12 August 2026

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदाThursday, 13 August 2026

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदा
Thursday, 13 August 2026

हरे एवं सफ़ेद रंग के लहरिया का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा श्रृंगार

विशेष – आज की सेवा श्रीरंगा सखी की ओर से होती है एवं वस्त्र-श्रृंगार नियम का हरे-श्वेत लेहरिया का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर लहरियाँ की छज्जेदार पाग और जमाव (नागफणी) के कतरे का धराया जाता है. 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आशावरी)

गावो गावो मंगलचार वधावो नंदके l
आवो आँगन कलश साजिके दधिफूल नूतन डार ll 1 ll
उरसों उर मिलि नंदराय गोप सबै निहार l
मागध सुत बंदीजन मिलिके द्वार करत उच्चार ll 2 ll
पायो पूरन आसकरि सब मिलि देत असीस l
नंदरायको कुंवर लाडिलो जीओ कोटि बरीस ll 3 ll
तब व्रजराज आनंद मगन दीने बसन मंगाय l
ऐसी शोभा देखिके जन ‘सूरदास’ बलि जाय ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज हरे एवं श्वेत रंग के लहरिया की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. 
चरणचौकी, पडघा, बंटा आदि जड़ाव स्वर्ण के होते हैं. चांदी के पडघा के ऊपर माटी के कुंजे में शीतल सुगन्धित जल भरा होता है. दो गुलाबदानियाँ गुलाब-जल भर कर तकिया के पास रखी जाती हैं. सम्मुख में धरती पर त्रस्टी धरे जाते हैं. 

वस्त्र – श्रीजी को आज हरे एवं श्वेत रंग के लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं. कमल माला धरायी जाती है.
श्रीमस्तक पर हरे एवं श्वेत लहरिया की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, जमाव (नागफणी) का कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (झीने लहरिया व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी चांदी की छोटी आती है.

Tuesday, 11 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या Wednesday, 12 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या 
Wednesday, 12 August 2026

हरियाली अमावस्या 

आज के हिंडोलना के दर्शन 

आज चौक में हरे पत्तों की बिछावट एवं मुख्य द्वारों पर हरे तोरणों की सजावट की जाती है. 
संध्या-आरती में हिंडोलना भी हरे पत्तों के भारी खम्भों से कलात्मक रूप से सुसज्जित होता है.
 श्री मदनमोहन जी हरे पत्तों के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कीर्तन हिंडोला– (राग-यमन)

सोहत वन आयोरी सावंन हरियारो ।
हरित भूमि पर इद्रवघूसी राधिका सब सखियन संगलीने पहेरे कसुंभी सारी कंचन तन ।।१।।
रंगभर सुरंग हिंडोरे झुलत नव नागरी नागर मानों रंगरवे चल्यो हें अेडी अंगूरिन ।
सूरदास मदनमोहन पिय के गुण गावत ये सुख अति आनंद मगन मन ।।२।।

Monday, 10 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्दशी (त्रयोदशी क्षय)Tuesday, 11 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्दशी (त्रयोदशी क्षय)
Tuesday, 11 August 2026

आज अति शोभित है नंदलाल ।
ग्वालपगा शिर ऊपर सोहे ऊर वनमाल ।।१।।
ता ऊपर एक चंद्रिका ज़रकसी धोती ऊपरना लाल ।
आगे गाय ग्वाल सब लेकें मुरली शब्द रसाल ।।२।।

कचनारीं (गहरे लाल) रंग के धोती-उपरना एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार 

विशेष – आज श्रीजी को कचनारीं (गहरे लाल) रंग के धोती-उपरना एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग धराये जाते हैं. 
आज के वस्त्रों की विशेषता यह है कि ये वस्त्र श्रीजी के वस्त्र तृतीय गृहाधीश्वर प्रभु श्री द्वारिकाधीशजी (कांकरोली) के घर से सिद्ध हो कर आते हैं.

राजभोग दर्शन - 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

व्रज पर नीकी आज घटा l
नेन्ही नेन्ही बुंद सुहावनी लागत चमकत वीज छटा ll 1 ll
गरजत गगन मृदंग बजावत नाचत मोर नटा l
तैसेई सुर गावत चातक पिक प्रगट्यो है मदन भटा ll 2 ll
सब मिलि भेट देत नंदलालहि बैठे ऊंची अटा l
‘कुंभनदास’ गिरिधरन लाल शिर कसुम्भी पीतपटा ll 3 ll

साज – श्रीजी में आज श्री महाप्रभुजी, श्री गुसांईजी, अन्य सात बालक एवं हिंडोलने के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. इस पिछवाई में स्वर्ण हिंडोलने का सुन्दर चित्रांकन इस प्रकार किया गया है कि श्री महाप्रभुजी श्रीजी को हिंडोलना झुला रहें हो ऐसा आभास होता है. श्री गुसाईजी एवं अन्य सात बालक श्रीजी की सेवा में खड़े हैं. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज कचनारीं (गहरे लाल) रंग की मलमल की धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर कचनारीं (गहरे लाल) रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सीधी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले चार कर्णफूल धराये जाते हैं.
 श्वेत एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट लाल एवं गोटी मीना की आती हैं.

Sunday, 9 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण द्वादशीMonday, 10 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण द्वादशी
Monday, 10 August 2026

हो झुलत ललित कदंब तरे।
पियको पीत पट प्यारी को लहेरिया रमकत खरे खरे।।१।।
एक भुजा दांडी गहि लीनी दूजी भुजा अंस धरे।
लांबे झोटा देत है प्यारी पुरषोत्तम अंक भरे।।२।।

मेवाड़ के प्रसिद्ध भोपालशाही लहरियाँ के वस्त्र एवं मुकुट और गोल-काछनी के अद्भुत शृंगार

आज श्रीजी को नियम का मुकुट और गोल-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है. आज धरायी जाने वाली काछनी को मोर-काछनी भी कहा जाता है. इसे मोर-काछनी इसलिए कहा जाता है क्योंकि आकार में यह खुले पंखों के साथ नृत्यरत मयूर (मोर) का आभास कराती है.

आज के अतिरिक्त मुकुट के साथ गोल-काछनी का श्रृंगार केवल शिवरात्रि के दिन धराया जाता है यद्यपि उस दिन काछनी का रंग अंगूरी (अंगूर जैसा हल्का हरा) होता है. 

आज श्रीजी में नियम से मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है. 
प्रभु को मुख्य रूप से तीन लीलाओं (शरद-रास, दान और गौ-चारण) के भाव से मुकुट का श्रृंगार धराया जाता है. 

अधिक गर्मी एवं अधिक सर्दी के दिनों में मुकुट नहीं धराया जाता इस कारण देव-प्रबोधिनी से फाल्गुन कृष्ण सप्तमी (श्रीजी का पाटोत्सव) तक एवं अक्षय तृतीया से रथयात्रा तक मुकुट नहीं धराया जाता. 

जब भी मुकुट धराया जाता है वस्त्र में काछनी धरायी जाती है. काछनी के घेर में भक्तों को एकत्र करने का भाव है. 

जब मुकुट धराया जाये तब ठाड़े वस्त्र सदैव श्वेत रंग के होते हैं. ये श्वेत वस्त्र चांदनी छटा के भाव से धराये जाते हैं. 

जिस दिन मुकुट धराया जाये उस दिन विशेष रूप से भोग-आरती में सूखे मेवे के टुकड़ों से मिश्रित मिश्री की कणी अरोगायी जाती है. 

आज संध्या-आरती के दर्शन में श्रीजी में नियम का सोने के हिंडोलने का मनोरथ होता है. 
श्रीजी के सम्मुख डोलतिबारी में श्री मदनमोहन जी सोने के हिंडोलने में झूलते हैं. श्री मदनमोहनजी के सभी वस्त्र एवं श्रृंगार श्रीजी को धराये आज के श्रृंगार जैसे ही होते हैं. श्री बालकृष्ण लालजी उनकी गोदी में विराजित होकर झूलते हैं

विक्रम संवत 2014 में नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोविन्दलालजी महाराजश्री ने आज के दिन मेवाड़ की महारानीजी के आग्रह पर उनके द्वारा जमा करायी गयी धनराशि से सोने के हिंडोलने का मनोरथ किया जो अब स्थायी रूप से प्रतिवर्ष इस दिन होता है.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

अरी इन मोरन की भांत देख नाचत गोपाला ।
मिलवत गति भेदनीके मोहन नटशाला ।।१।।
गरजत धन मंदमद दामिनी दरशावे ।
रमक झमक बुंद परे राग मल्हार गावे ।।२।।
चातक पिक सधन कुंज वारवार कूजे ।
वृंदावन कुसुम लता चरण कमल पूजे ।।३।।
सुरनर मुनि कामधेनु कौतुक सब आवे ।
वारफेर भक्ति उचित परमानंद पावे ।।४।।

साज – साज- श्रीजी में आज वर्षा ऋतु में श्री कृष्ण व बलराम जी के व्रजभक्तों संग वनविहार व बालसखाओं संग क्रीड़ा के सुन्दर चित्रांकन नृत्य की मुद्रा में  वाली पिछवाई धरायी जाती है.
गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज सूथन, मोरकाछनी (गोल-काछनी) एवं रास पटका धराया जाता है. सभी वस्त्र पीले भोपालशाही लहरिया के और सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. 
ठाड़े वस्त्र सफेद जामदानी (चिकन) के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर सिलमा सितारा का मुकुट एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में हीरा के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
आज चोटीजी नहीं धरायी जाती है. 
कली, कस्तूरी एवं कमल माला धरायी जाती है. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. 
भाभीजी वाले वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट केसरी व गोटी मोर वाली आती है.

Saturday, 8 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण एकादशी Sunday, 09 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण एकादशी 
Sunday, 09 August 2026

कामिका एकादशी

विशेष – आज कामिका एकादशी है. आज श्रीजी को नियम का दोहरा मल्लकाछ व टिपारा का श्रृंगार धराया जायेगा.

मल्लकाछ शब्द दो शब्दों (मल्ल एवं कच्छ) से बना है. 
ये एक विशेष परिधान है जो आम तौर पर पहलवान मल्ल (कुश्ती) के समय पहना करते हैं. यह बालभाव का श्रृंगार पराक्रमी प्रभु को वीर-रस की भावना से धराया जाता है.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी फल फूल के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

वृन्दावन कनकभूमि नृत्यत व्रज नृपतिकुंवर l
उघटत शब्द सुमुखी रसिक ग्रग्रतततत ता थेई थेई गति लेत सुघर ll 1 ll
लाल कांछ कटि किंकिणी पग नूपुर रुनझुनत बीच बीच मुरली धरत अधर l
‘गोविंद’ प्रभु के जु मुदित संगी सखा करत प्रशंसा प्रेमभर ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में श्री गिरिराज-धारण की लीला के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. पिछवाई में श्री कृष्ण एवं बलदेव जी मल्लकाछ टिपारा के श्रृंगार में हैं एवं ग्वाल-बाल व गायें संग खड़ी हैं. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज एक आगे का पटका लाल एवं सफेद लहरियाँ का एवं मल्लकाछ तथा दूसरा कंदराजी का हरा एवं सफ़ेद लहरियाँ का पटका तथा मल्लकाछ धराया जाता है. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हैं. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को श्री कंठ के शृंगार छेड़ान के धराए जाते हे बाक़ी श्रृंगार भारी धराया जाता है. 
हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर टिपारा का साज धराया जाता है जिसमें लाल रंग के दुमाला के ऊपर सिरपैंच, मध्य में मोरशिखा, दोनों ओर दोहरे कतरा और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. चोटीजी नहीं धरायी जाती.
कमल माला धरायी जाती है.
श्वेत एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक झीने लहरिया व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट लाल व गोटी चांदी की बाघ-बकरी की आती है.

सीस टिपारो धरें मल्लकाछ ऊर गज़मोतीन माल,
तापर तीन चंद्रिका राजत सोभित है नंदलाल.

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज)Saturday, 15 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण शुक्ल तृतीया (ठकुरानी तीज) Saturday, 15 August 2026 ठकुरानी तीज सभी वैष्णवों को ठकुरानी तीज की बधाई आज से श्रीजी को च...