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Tuesday, 4 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी Wednesday, 05 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी 
Wednesday, 05 August 2026

फ़िरोज़ी धोरा के सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार 

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो. 
इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था. 

ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में लगभग छह बार धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के दिन निश्चित नहीं हैं.

ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत 
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज फ़िरोज़ी रंग की मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज फ़िरोज़ी रंग के धोरा का सुथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

शृंगार - ठाकुरजी को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण गुलाबी मीना के छेड़ान के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर फ़िरोज़ी फेंटा का साज धराया जाता है जिसमें फ़िरोज़ी रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कमल माला धरायी जाती है. 
श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट फ़िरोज़ी रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

Monday, 3 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण षष्ठीTuesday, 04 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण षष्ठी
Tuesday, 04 August 2026

देखो माई अति बने है गोपाल ।
तन राजत है श्याम पिछोरा श्याम पाग धरे भाल ।।१।।
श्याम ऊपरना श्याम ही फेंटा श्याम घटा अति लाल ।
रसिक प्रीतम अबके जो पाऊँ गरे धराऊँ वनमाल ।।२।।

स्याम पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के श्रृंगार 

विशेष – श्रीजी में आज नियम से श्याम रंग का पिछोड़ा और श्याम रंग के ग्वाल पगा का श्रृंगार धराया जाता है. 
जन्माष्टमी की बधाई से एक माह तक श्याम,बेंगनी,बादली इत्यादि रंग नहीं धराए जाते हे.
आज का यह श्रृंगार श्री यमुनाजी की प्रिय सखी श्यामाजी के भाव से होता है और आज की सेवा उन्हीं की ओर की है.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी फूल पत्ती के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

कारे कारे बदरा देस देस ते उलरे श्याम बरन सब रुख भयो l
मनो हो मदन मिल्यो मदन मोहन सों करत ओट महा सघन तिमिर के बासन ननरो ll 1 ll
मोरन की सोर अति पिक को पपैया कुहूकात नुपूर धुन अलसे धूनतयो l
‘धोंधी’ के प्रभु बोली चली तहां जहाँ पातन की सेज करी पातन छयो ll 2 ll  

साज – श्रीजी में आज श्याम रंग की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज श्याम रंग की मलमल का सुनहरी किनारी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है. सोने के के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर श्याम रंग की ग्वालपाग (पगा) के ऊपर मोती की लूम, सुनहरी चमक (जमाव) की चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.
आज कमल माला धरावे.
 श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी व कमल के पुष्प की मालाजी  धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट राग रंग का व गोटी बाघ बकरी की आती हैं.

Sunday, 2 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण पंचमी Monday, 03 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण पंचमी 
Monday, 03 August 2026

सेहरा के श्रृंगार

विशेष –  आज श्रीजी को इस ऋतु का अंतिम सेहरे का श्रृंगार धराया जायेगा.

श्रावण कृष्ण अष्टमी से जन्माष्टमी की बधाई बैठेगी, प्रभु को बालभाव के श्रृंगार अधिक धराये जायेंगे और सेहरा कुमारभाव का श्रृंगार है अतः आज के बाद आश्विन नवरात्री तक श्रीजी को सेहरा नहीं धराया जाता. 

आज के दिन सखियों ने साकेत वन में प्रिया-प्रीतम को सेहरे का श्रृंगार धराकर हिंडोलना झुलाया था इस भाव से यह श्रृंगार धराया जाता है.

आज श्रीजी को अमरसी पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर अमरसी छज्जेदार पाग के ऊपर सेहरा धराया जायेगा. 

संध्या-आरती में कमलचौंक में श्री मदनमोहन जी केसरी सलमा सितारा के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

सखी री सावन दूल्हे आयो l
शीश सहेरो सरस गजमुक्ता हीरा बहुत जरायो ll 1 ll
लाल पिछोरा सोहे सुन्दर सोवत मदन जगायो l
तेसीये वृषभान नंदिनी ललिता मंगल गायो ll 2 ll
दादुर मोर पपैया बोले बदरा बराती आयो l
‘सूरदास’ प्रभु तिहारे दरसकों दामिनी हरख दिखायो ll 3 ll  

साज – आज श्रीजी में साकेत वन में विवाह के भाव की लग्नमंडप के चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें श्री ठाकुरजी के साथ श्री स्वामिनीजी एवं श्री यमुनाजी के सेहरे के श्रृंगार में दर्शन होते हैं और सखियाँ मंगल गीत गा रहीं हैं. 
गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज अमरसी मलमल का पिछोड़ा एवं राजशाही पटका धराया जाता है. पटका रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फिरोज़ा के सर्वआभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर रुपहली ज़री की बाहर की खिडकी की अमरसी छज्जेदार पाग के ऊपर हीरा व माणक का सेहरा धराया जाता है. 
बायीं ओर दो तुर्री, लूम रुपहली ज़री की एवं दायीं ओर मीना की चोटी धरायी जाती हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
कस्तूरी, कली व कमल माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की थाग वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, फिरोज़ा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक फिरोज़ा व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट केसरी व गोटी राग-रंग की आती है.

Saturday, 1 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्थी Sunday 02 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्थी 
Sunday 02 August 2026

हरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के शृंगार

विशेष – आज का श्रृंगार श्री ललिताजी की भाव से होता है. श्रीजी को नियम के हरी मलमल का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर जमाव का कतरा धराया जाता है.  
अनोसर में श्रीमस्तक पर धरायी पाग के ऊपर की सुनहरी खिड़की बड़ी कर के धरायी जाती है.

संध्या-आरती में कमलचौंक में श्री मदनमोहन जी चांदी के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

व्रज पर नीकी आजघटा l
नेन्ही नेन्ही बुंद सुहावनी लागत चमकत बीजछटा ll 1 ll
गरजत गगन मृदंग बजावत नाचत मोर नटा l
तैसेई सुर गावत आतक पिक प्रगट्यो है मदन भटा ll 2 ll
सब मिलि भेट देत नंदलाल हि बैठे ऊंची अटा l
‘कुंभनदास’ गिरिधरन लाल सिर कसुम्भी पीत पटा ll 3 ll  

साज – श्रीजी में आज हरे रंग की मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस की पठानी किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज हरे मलमल का सुनहरी पठानी किनारी से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के होते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक तथा सोने के सर्वआभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर हरे रंग की सुनहरी जरी की बाहर की खिड़की की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, सुनहरी लूम तथा जमाव का कतरा सुनहरी तु्र्री एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कमल माला धरायी जाती है. सफेद एवं पीले पुष्पों की सुन्दर दो मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं दो वैत्रजी धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी लाल मीना की आती है. 
 अनोसर में पाग पे से सुनहरी खिड़की बड़ी करके धरायी जाती हैं.

Friday, 31 July 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण तृतीयाSaturday, 01 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण तृतीया
Saturday, 01 August 2026

देखो माई शोभा श्यामल तनकी।
मानों लई रसिक नंदनंदन सब गति नौतन धनकी।।१।।
निरख सखी नीलांबर को छोर।
झूम रह्ये सखी वदन चंदपें आई घटा घनघोर।।२।।

नील कुल्हे का श्रृंगार

विशेष – आज श्रीजी को नियम का श्रृंगार धराया जाता है. वर्षभर में केवल आज ही श्रीजी को नील कुल्हे (गहरे आसमानी रंग की कुल्हे) धरायी जाती है और कुल्हे के ऊपर सुनहरी चमक का घेरा धराया जाता है. 

आज का उत्सव श्री यमुनाजी की ओर से होता है. श्री यमुनाजी और श्री गिरिराजजी के भाव से आज गहरे आसमानी रंग के वस्त्र एवं कुल्हे धरायी जाती है.

राजभोग दर्शन -

कीर्तन – (राग : मल्हार)

तेसीय हरित भूमि तेसीय बूढ़न शोभा तेसोई इन्द्र को धनुष मेहसों l
तेसीय घुमड़ घटा वरषत बूंदन तेसेई नाचत मोर नेह सों ll 1 ll
वृन्दावन सघन कुंज गिरीगहवर विरहत श्याम श्यामा सोहें दामिनी सं देहसों l
‘छीतस्वामी’ गुननिधान गोवर्धनधारी लाल मध्य तहां गान करत लाल तान गेहसों ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज गहरे आसमानी (शोशनी) रंग की मलमल की सुनहरी लप्पा (ज़री की तुईलैस की किनारी) से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज गहरे आसमानी (शोशनी) मलमल का सुनहरी लप्पा (ज़री की तुईलैस की किनारी) से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के होते हैं.

श्रृंगार - श्रीजी को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं. कस्तूरी, कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. 
श्रीमस्तक पर नील कुल्हे के ऊपर सुनहरी चमक का घेरा एवं बायीं ओर हीरा का शीशफूल, दो हीरा की तुर्री धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
 स्वरुप की बायीं ओर मीना की शिखा (चोटीजी) धरायी जाती हैं. 
तुलसी व पीले पुष्पों की सुन्दर कलात्मक दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक भाभीजी वाले व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट आसमानी व गोटी राग-रंग की आती है.

Thursday, 30 July 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण तृतीया Friday, 31 July 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण तृतीया 
Friday, 31 July 2026

हिंडोलना रोपण के परचारगी श्रृंगार

विशेष – आज का श्रीजी का श्रृंगार कल के श्रृंगार का परचारगी श्रृंगार है.

अधिकांश बड़े उत्सवों के एक दिन उपरांत उस उत्सव का परचारगी श्रृंगार धराया जाता है. 

इसमें सभी वस्त्र एवं श्रृंगार लगभग सम्बंधित उत्सव की भांति ही होते हैं. इसे परचारगी श्रृंगार कहते हैं. परचारगी श्रृंगार के श्रृंगारी श्रीजी के परचारक महाराज अगर यहाँ बिराज रहे होवे तो (चिरंजीवी श्री विशाल बावा) होते हैं.

आज का श्रृंगार चन्द्रावलीजी की ओर से किया जाता है अतः कल के उलट वस्त्र पीले धराये जाते हैं और ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

चल सखी देखन नंद किशोर l
श्रीराधाजु संग लीये बिहरत रुचिर कुंज घन सोर ll 1 ll
उमगी घटा चहुँ दिशतें बरखत है घनघोर l
तैसी लहलहातसों दामन पवन नचत अति जोर ll 2 ll
पीत वसन वनमाल श्याम के सारी सुरंग तनगोर l
जुग जुग केलि करो ‘परमानंद’ नैन सिरावत मोर ll 3 ll

साज – श्रीजी में आज पीले रंग की मलमल की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज पीले रंग की मलमल का रुपहरी लप्पा का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं. कल ललिताजी की भावना से लाल वस्त्र धराये थे और आज के वस्त्र चन्द्रावलीजी की भावना से पीले होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के माणक के आभरण धराये जाते हैं. 
कस्तूरी, कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. 
श्रीकंठ में नीचे पदक, ऊपर हीरा, पन्ना, माणक, मोती के हार व दुलड़ा धराया जाता है. 
श्रीमस्तक पर पीले रंग की (आसमानी बाहर की खिडकी की) छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, पन्ने की लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में हीरा के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक माणक व एक हीरा के) धराये जाते हैं. 
पट उत्सव का, गोटी सोने की छोटी व आरसी सोने की डांडी की आती है. प्रातः श्रृंगार में आरसी चार झाड़ की आती है.

Wednesday, 29 July 2026

व्रज- विस २०८३ श्रावण कृष्ण प्रतिपदाThursday, 30 July 2026

व्रज- विस २०८३ श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
Thursday, 30 July 2026

हिन्डोलना रोपण

विशेष - श्रावण मास प्रारंभ हो चुका हैं.
आज प्रभु को हिंडोलना रोपण किया जायेगा. कल प्रभु को उष्णकाल के अंतिम मोती के आभरण धराये गये. आज से ठाड़े वस्त्र धराये जायेंगे. 

श्रावण मास में भगवान शंकर अपनी अर्धांगिनी माता पार्वतीजी के साथ पृथ्वी पर निवास करते हैं अतः इस मास में शिव की पूजा का विशेष महत्व है.

आज नियम का लाल पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर पाग व मोर-चंद्रिका का श्रृंगार धराया जाता है. 

श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से चारोली (चिरोंजी) के लड्डू एवं केशरी बासोंदी (रबड़ी) की हांड़ी का भोग अरोगाया जाता है. 
राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता, सखड़ी में मीठी सेव व केशरयुक्त पेठा अरोगाये जाते हैं. 

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : मल्हार)

सखीरी सावन दूल्हे आयो l
चार मास के लग्न लिखाये, बदरन अंबर छायो ll 1 ll
बिजुरी चमके बगुआ बराती कोयल शब्द सुनायो l
दादुर मोर पपैया बोले इन्द्र निशान बजायो ll 2 ll
हरी हरी भूमि पर इन्द्रवधु सी रंग बिछोना बिछायो l
‘सूरदास’ प्रभु तिहारे मिलनको सखियन मंगल गायो ll 3 ll  

साज – श्रीजी में आज लाल रंग की मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. सिंहासन, चरणचौकी, पड़घा, झारीजी, बंटाजी आदि जड़ाव सोने के रखे जाते हैं. मात्र दो गुलाबदानी, माटी के झारीजी का पड़धा एवं त्रस्टीजी चांदी के रहते हैं. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. आज से चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट नहीं की जाती.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल रंग की मलमल का सुनहरी लप्पा का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के होते हैं. आज की सेवा ललिताजी एवं चन्द्रावली जी के भाव से होने के कारण लाल अनुराग के रंग के वस्त्र धराये जाते हैं. श्री स्वामिनीजी के भाव से पीले ठाड़े वस्त्र धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
नीचे पदक,ऊपर हीरा, पन्ना,मानक मोती के हार,माला,दुलड़ा धराये जाते हैं.
 कस्तूरी, कली आदि सभी माला धरायी जाती है.
श्रीमस्तक पर लाल (हरी बाहर की खिडकी की) छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में माणक के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
रंग-बिरंगी पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का, गोटी सोने की जाली की व आरसी श्रृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी Wednesday, 05 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी  Wednesday, 05 August 2026 फ़िरोज़ी धोरा के सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार  श्रीजी ने अपने सभी भक्तों क...