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Friday, 7 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण दशमीSaturday, 08 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण दशमी
Saturday, 08 August 2026
                    
आज सखी गोकुलचंद बिराजे ।
न्हेनी न्हेनी बूँदन बरखन लाग्यो मंद मंद घन गाजे ।।१।।
मोरमुकुट मकराकृत कुंडल वनमाला छबी छाजे ।
कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर प्रकटे भक्त हित काजे ।।२।।

नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज का प्राकट्योत्सव (हांडी उत्सव)

विशेष – आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराजश्री का प्राकट्योत्सव है. 
आपका प्राकट्य वि.सं.1763 में नाथद्वारा में हुआ था. आप एक विद्वान साहित्यकार एवं भावनाशील कलाकार थे. आप विविध कीर्तनों की रचना से एवं अनेक मनोरथों द्वारा श्रीगोवर्धनधारी प्रभु को रिझाते थे.
आपने ही प्रथम हांड़ी-उत्सव रौशनी में नंदालय की भावना से किया था और श्री ठाकुरजी को रत्नजड़ित मणि-माणक के हिंडोलने में झुलाया था.
आपश्री ने ही प्रथम बार नाथद्वारा में अन्नकूट मनोरथ पर सात स्वरूपों को पधराया था जिसमें श्री मथुराधीशजी, श्री विट्ठलनाथजी, श्री द्वारिकाधीशजी, श्री गोकुलनाथजी, श्री गोकुलचन्द्रमाजी, श्री बालकृष्णजी, श्री मदनमोहनजी आदि स्वरूप पधारे थे. 
नाथद्वारा में दो माह तक विविध मनोरथ हुए थे. विक्रम संवत 1796 के मार्गशीर्ष शुक्ल नवमी के दिन दिव्य सप्तस्वरूपोत्सव किया और छप्पनभोग धराया.

श्रीजी का सेवाक्रम - आज नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज का उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.

सभी समय झारीजी मे यमुनाजल भरा जाता है. दिन में दो समय की आरती थाली में की जाती है.
गेंद, चौगान, दीवला सोने के आते हैं.

आज श्रीजी में नियम से मुकुट-काछनी का श्रृंगार धराया जाता है. 

आज श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से केशरयुक्त जलेबी के टूक एवं दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. 

राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता, सखड़ी में केसरी पेठा व मीठी सेव अरोगायी जाती है.

भोग समय अरोगाये जाने वाले फीका के स्थान पर घी में तला बीज-चालनी का सूखा मेवा अरोगाया जाता है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

माईरी श्यामधन तन दामिनी दमकत पीताम्बर फर हरे l
मुक्ता माल बगजाल कही न परत छबी विशाल मानिनीकी अरहरे ll 1 ll
मोर मुकुट इन्द्र धनुषसो सुभग सोहत मोहत मानिनी धुति थर हरे l
‘कृष्णजीवन’ प्रभु पुरंदरकी शोभा निधान मुरलिकाकी घोर घरहरे ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज गौचारण लीला के चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें श्री ठाकुरजी ग्वाल-बाल सहित गौचारण कर पधारे हैं और गोपीजन उनका स्वागत हाथों में आरती लिये कर रही हैं. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.
उत्थापन पीछे भोग आरती में रूपहली कटोरी वाली लाल मख़मल की पिछवाई धरायी जाती हैं.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल (कसुमल) रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, काछनी एवं गाती का पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र श्वेत जामदानी (डोरिया) के होते हैं.

श्रृंगार – वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. उत्सव के मिलवा - हीरे की प्रधानता के आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लाल चांदी के काम का मुकुट एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. मुकुट पर माणक का सिरपैंच धराया जाता है.

श्रीकर्ण में मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
कली, कस्तूरी आदि सभी माला धरायी जाती हैं.
नीचे पदक ऊपर हार, माला धराये जाते हैं. आज दो पाटन वाले हार धराये जाते हैं.
कमल के पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी जाती है.
आज पुष्प की माला सभी समय एक-एक ही आती हैं. 
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट लाल, गोटी सोने की जाली की व आरसी शृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

Thursday, 6 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण नवमी Friday, 07 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण नवमी 
Friday, 07 August 2026

लहरिया के वस्त्र आरम्भ

सुखद वर्षा ऋतु के आगमन से आज से श्रीजी में पुनः लहरिया के वस्त्र धराये जाने आरम्भ हो जाते हैं. 
अनुराग पूर्ण लाल धरती पर पंचरंगी लहरिया की पिछवाई, पंचरंगी लहरिया के वस्त्र (पाग एवं पिछोड़ा), श्रीमस्तक पर हीरा की तीन कलंगी, मोर वाला सिरपैंच के ऊपर जमाव (नागफणी) के कतरे का श्रृंगार वर्षभर में केवल आज के दिन ही धराया जाता है. 

आज की सेवा चन्द्रावलीजी की ओर से होती है.

द्वितीय गृह प्रभु श्री विट्ठलनाथजी में आज श्री रघुनाथ जी महाराज का उत्सव है.
प्राचीन परंपरानुसार श्रीजी व श्री नवनीतप्रियाजी को धराये जाने वाले आज के वस्त्र द्वितीय गृह प्रभु श्री विट्ठलनाथजी के घर (मंदिर) से सिद्ध हो कर आते हैं. 
वस्त्रों के साथ श्रीजी और श्री नवनीतप्रियाजी के भोग हेतु रसरूप घेरा (जलेबी) की छाब भी  पधारती है.
मैं पूर्व में भी बता चुका हूँ कि वर्ष में लगभग 16 बार श्रीजी व श्री नवनीतप्रियाजी के वस्त्र द्वितीय गृह से पधारते हैं.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी चितराम के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कल अर्थात श्रावण कृष्ण दशमी को श्रीजी में नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनेशजी महाराज श्री का प्राकट्योत्सव (हांड़ी उत्सव) है.
प्रभु को मुकुट-काछनी का अद्भुत श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

गहर गहर गाजें बदरा समूह साजें छहर छहर मेह बरखे सुघरियां l
कहर कहर करें पवन अरु पानी अति महर महर करें भूतल महरियाँ ll 1 ll
फहर फहर करे प्यारेको पीतांबर लहेर लहेर करे प्यारी को लहरियां l
‘कृष्णदास’ यह सुख देखवे को गावत मल्हार राग गहें कदंबकी डरियां ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज पंचरंगी लहरिया की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज रुपहली ज़री से सुसज्जित पंचरंगी लहरिया का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर पंचरंगी छज्जेदार पाग के ऊपर मोर वाला सिरपैंच, हीरा की तीन किलंगी, जमाव (नागफणी) का कतरा और बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कली, कस्तूरी व वैजयंती माला धरायी जाती है. 
पीले एवं श्वेत पुष्पों के सुन्दर कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, भाभीजी वाले वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट लाल व गोटी हरे लहरिया की आती है.

Wednesday, 5 August 2026

व्रज -विस 2083 श्रावण कृष्ण अष्टमी Saturday, 06 August 2026

व्रज -विस 2083 श्रावण कृष्ण अष्टमी 
Saturday, 06 August 2026

जन्माष्टमी की बधाई बैठे, जन्माष्टमी का प्रतिनिधि का श्रृंगार

विशेष – आज से ठीक एक मास पश्चात भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी होगी अतः आज उत्सव से एक माह पूर्व जन्माष्टमी के उत्सव की बधाई बैठती है. 

श्रीजी को आज जन्माष्टमी का प्रतिनिधि का श्रृंगार धराया जाता है.
प्रतिनिधि के श्रृंगार का अर्थ उत्सव के आगमन के आभास से है अथवा यूं कहा जा सकता है कि प्रभु के प्राकट्य की शुभ घड़ी निकट ही है अतः बालक श्रीकृष्ण के स्वागत की तैयारी प्रारंभ कर लीजिये.

जन्माष्टमी-नंदमहोत्सव की बधाई एक माह पूर्व बैठती है इसके विविध भाव भी जान लीजिये –

यह उत्सव महामहोत्सव होने के कारण यशोदाजी एवं रोहिणीजी के भाव से 15-15 दिन बधाई बैठती है.

इसी प्रकार श्री महाप्रभुजी (श्री स्वामिनीजी) एवं श्री गुसाईंजी (श्री चन्द्रावलीजी) के भाव से 15-15 दिन की बधाई बैठती है.

वैसे अन्य भाव में वात्सल्य एवं मधुर भाव से बधाई बैठती है. 

इसमें भी चार यूथाधिपतियों के भाव से चार बधाई बैठती है. विभिन्न प्रकार के वाधों द्वारा अगले एक मास की (आज से) झांझ की बधाई श्री यमुनाजी के भाव से, बारह दिन की (पवित्रा द्वादशी से) नौबत की बधाई श्री चन्द्रावलीजी के भाव से, आठ दिन की (रक्षाबंधन से) मांदल की बधाई श्री स्वामिनीजी के भाव से एवं इसी प्रकार आठ दिन की (रक्षाबंधन से) गीत गाने वाली गोपीजनों की बधाई कुमारिकाजी भाव से होती है.

आज से श्रीजी में बालभाव के कीर्तन गाये जाते हैं, बालभाव के श्रृंगार धराये जाते हैं

सेवाक्रम- संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी सोने के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

कल अर्थात श्रावण कृष्ण नवमी को श्रीजी को विशिष्ट पंचरंगी लहरिया का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर पाग पर तीन कलंगी वाले सिरपैंच के ऊपर नागफणी के कतरे का श्रृंगार धराया जायेगा. 
यह श्रृंगार वर्षभर में केवल कल के दिन ही धराया जाता है. 

इन वस्त्रों की कुछ और भी विशेषता है जो कि मैं कल की post में बताने का प्रयास करूंगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आसावरी)

धन्य यशोदा भाग तिहारो जिन ऐसो सुत जायो हो l
जाके दरस परस सुख उपजत कुलको तिमिर नसायो हो ll 1 ll
विप्र सुजन चारन बंदीजन सबै नंदगृह आये हो l
नौतन सुभग हरद दूब दधि हरषित सीस बरसाये हो ll 2 ll
गर्ग निरुप किये सुभ लच्छन अवगत है अविनासी l
‘सूरदास’ प्रभुको जस सुनिकै आनंदे व्रजवासी ll 3 ll

साज – श्रीजी में आज लाल रंग की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित, उत्सव की कमल के बड़े लप्पा वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है. 

वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी मलमल का रुपहली किनारी से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का उत्सववत भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरे, मोती, माणक, पन्ना तथा जड़ाव सोने के तीन जोड़ी के आभरण धराये जाते हैं. 
नीचे पदक व ऊपर हार, माला आदि धराये जाते हैं. त्रवल, टोडर दोनों धराये जाते हैं. एक हालरा, बघनखा भी धराया जाता है.  
श्रीमस्तक पर रुपहली किनारी से सुसज्जित केसरी मलमल की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पांच मोरपंख की चन्द्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. उत्सव की हीरा की चोटी (शिखा) धरायी जाती है. 
कली, कस्तूरी आदि सब माला धरायी जाती है. पीले एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, हीरा की वेणुजी एवं दो (एक सोना का) वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का, गोटी जडाऊ की छोटी आती हैं.
 आरसी श्रृंगार में पीले खंड की एवं राजभोग में सोना की डाँडी की आती है. 

Tuesday, 4 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी Wednesday, 05 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण सप्तमी 
Wednesday, 05 August 2026

फ़िरोज़ी धोरा के सुथन, फेंटा और पटका के श्रृंगार 

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी जाति या धर्म से हो. 
इसी भाव से आज ठाकुर जी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं. यह श्रृंगार ताज़बीबी की विनती पर सर्वप्रथम भक्तकामना पूरक श्री गुसांईजी ने धराया था. 

ताज़बीबी की ओर से यह श्रृंगार वर्ष में लगभग छह बार धराया जाता है यद्यपि इस श्रृंगार को धराने के दिन निश्चित नहीं हैं.

ताज़बीबी बादशाह अकबर की बेग़म, प्रभु की भक्त और श्री गुसांईजी की परम-भगवदीय सेवक थी. उन्होंने कई कीर्तनों की रचना भी की है और उनके सेव्य स्वरुप श्री ललितत्रिभंगी जी वर्तमान में गुजरात के पोरबंदर में श्री रणछोड़जी की हवेली में विराजित हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : तोडी)

देख गजबाज़ आज वृजराज बिराजत गोपनके शीरताज ।
देस देस ते खटदरसन आवत मनवा छीत कूल पावत 
किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज़ ।।१।।
सुरभि तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचन मनी दीने, सो सुत हित के काज ।
हरि नारायण श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन,
महेर मुदित मन बंधि है धर्म की पाज ।।२।।

साज - श्रीजी में आज फ़िरोज़ी रंग की मलमल पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी की धोरेवाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है और चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल जड़ी होती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज फ़िरोज़ी रंग के धोरा का सुथन और राजशाही पटका धराया जाता है. दोनों वस्त्र रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के होते हैं.

शृंगार - ठाकुरजी को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण गुलाबी मीना के छेड़ान के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर फ़िरोज़ी फेंटा का साज धराया जाता है जिसमें फ़िरोज़ी रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, बीच की चंद्रिका, कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कमल माला धरायी जाती है. 
श्वेत एवं पीले पुष्पों की रंग-बिरंगी कलात्मक थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी(एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट फ़िरोज़ी रंग का व गोटी बाघ-बकरी की आती है.

Monday, 3 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण षष्ठीTuesday, 04 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण षष्ठी
Tuesday, 04 August 2026

देखो माई अति बने है गोपाल ।
तन राजत है श्याम पिछोरा श्याम पाग धरे भाल ।।१।।
श्याम ऊपरना श्याम ही फेंटा श्याम घटा अति लाल ।
रसिक प्रीतम अबके जो पाऊँ गरे धराऊँ वनमाल ।।२।।

स्याम पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के श्रृंगार 

विशेष – श्रीजी में आज नियम से श्याम रंग का पिछोड़ा और श्याम रंग के ग्वाल पगा का श्रृंगार धराया जाता है. 
जन्माष्टमी की बधाई से एक माह तक श्याम,बेंगनी,बादली इत्यादि रंग नहीं धराए जाते हे.
आज का यह श्रृंगार श्री यमुनाजी की प्रिय सखी श्यामाजी के भाव से होता है और आज की सेवा उन्हीं की ओर की है.

संध्या-आरती में श्री मदनमोहन जी फूल पत्ती के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

कारे कारे बदरा देस देस ते उलरे श्याम बरन सब रुख भयो l
मनो हो मदन मिल्यो मदन मोहन सों करत ओट महा सघन तिमिर के बासन ननरो ll 1 ll
मोरन की सोर अति पिक को पपैया कुहूकात नुपूर धुन अलसे धूनतयो l
‘धोंधी’ के प्रभु बोली चली तहां जहाँ पातन की सेज करी पातन छयो ll 2 ll  

साज – श्रीजी में आज श्याम रंग की मलमल पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है तथा स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज श्याम रंग की मलमल का सुनहरी किनारी का पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है. सोने के के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर श्याम रंग की ग्वालपाग (पगा) के ऊपर मोती की लूम, सुनहरी चमक (जमाव) की चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में लोलकबंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.
आज कमल माला धरावे.
 श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी व कमल के पुष्प की मालाजी  धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट राग रंग का व गोटी बाघ बकरी की आती हैं.

Sunday, 2 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण पंचमी Monday, 03 August 2026

व्रज -विस २०८३ श्रावण कृष्ण पंचमी 
Monday, 03 August 2026

सेहरा के श्रृंगार

विशेष –  आज श्रीजी को इस ऋतु का अंतिम सेहरे का श्रृंगार धराया जायेगा.

श्रावण कृष्ण अष्टमी से जन्माष्टमी की बधाई बैठेगी, प्रभु को बालभाव के श्रृंगार अधिक धराये जायेंगे और सेहरा कुमारभाव का श्रृंगार है अतः आज के बाद आश्विन नवरात्री तक श्रीजी को सेहरा नहीं धराया जाता. 

आज के दिन सखियों ने साकेत वन में प्रिया-प्रीतम को सेहरे का श्रृंगार धराकर हिंडोलना झुलाया था इस भाव से यह श्रृंगार धराया जाता है.

आज श्रीजी को अमरसी पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर अमरसी छज्जेदार पाग के ऊपर सेहरा धराया जायेगा. 

संध्या-आरती में कमलचौंक में श्री मदनमोहन जी केसरी सलमा सितारा के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : मल्हार)

सखी री सावन दूल्हे आयो l
शीश सहेरो सरस गजमुक्ता हीरा बहुत जरायो ll 1 ll
लाल पिछोरा सोहे सुन्दर सोवत मदन जगायो l
तेसीये वृषभान नंदिनी ललिता मंगल गायो ll 2 ll
दादुर मोर पपैया बोले बदरा बराती आयो l
‘सूरदास’ प्रभु तिहारे दरसकों दामिनी हरख दिखायो ll 3 ll  

साज – आज श्रीजी में साकेत वन में विवाह के भाव की लग्नमंडप के चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है जिसमें श्री ठाकुरजी के साथ श्री स्वामिनीजी एवं श्री यमुनाजी के सेहरे के श्रृंगार में दर्शन होते हैं और सखियाँ मंगल गीत गा रहीं हैं. 
गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज अमरसी मलमल का पिछोड़ा एवं राजशाही पटका धराया जाता है. पटका रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला (चरणारविन्द तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फिरोज़ा के सर्वआभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर रुपहली ज़री की बाहर की खिडकी की अमरसी छज्जेदार पाग के ऊपर हीरा व माणक का सेहरा धराया जाता है. 
बायीं ओर दो तुर्री, लूम रुपहली ज़री की एवं दायीं ओर मीना की चोटी धरायी जाती हैं. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
कस्तूरी, कली व कमल माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की थाग वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में एक कमल की कमलछड़ी, फिरोज़ा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक फिरोज़ा व एक सोने के) धराये जाते हैं.
पट केसरी व गोटी राग-रंग की आती है.

Saturday, 1 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्थी Sunday 02 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण चतुर्थी 
Sunday 02 August 2026

हरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के शृंगार

विशेष – आज का श्रृंगार श्री ललिताजी की भाव से होता है. श्रीजी को नियम के हरी मलमल का पिछोड़ा व श्रीमस्तक पर जमाव का कतरा धराया जाता है.  
अनोसर में श्रीमस्तक पर धरायी पाग के ऊपर की सुनहरी खिड़की बड़ी कर के धरायी जाती है.

संध्या-आरती में कमलचौंक में श्री मदनमोहन जी चांदी के हिंडोलने में झूलते हैं. उनके सभी वस्त्र श्रृंगार श्रीजी के जैसे ही होते हैं. आज श्री बालकृष्णलाल जी भी उनकी गोदी में विराजित हो झूलते हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : मल्हार)

व्रज पर नीकी आजघटा l
नेन्ही नेन्ही बुंद सुहावनी लागत चमकत बीजछटा ll 1 ll
गरजत गगन मृदंग बजावत नाचत मोर नटा l
तैसेई सुर गावत आतक पिक प्रगट्यो है मदन भटा ll 2 ll
सब मिलि भेट देत नंदलाल हि बैठे ऊंची अटा l
‘कुंभनदास’ गिरिधरन लाल सिर कसुम्भी पीत पटा ll 3 ll  

साज – श्रीजी में आज हरे रंग की मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस की पठानी किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी और तकिया के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है. स्वर्ण की रत्नजड़ित चरणचौकी के ऊपर हरी मखमल मढ़ी हुई होती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज हरे मलमल का सुनहरी पठानी किनारी से सुसज्जित पिछोड़ा धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के होते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक तथा सोने के सर्वआभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर हरे रंग की सुनहरी जरी की बाहर की खिड़की की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, सुनहरी लूम तथा जमाव का कतरा सुनहरी तु्र्री एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कमल माला धरायी जाती है. सफेद एवं पीले पुष्पों की सुन्दर दो मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में कमलछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं दो वैत्रजी धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी लाल मीना की आती है. 
 अनोसर में पाग पे से सुनहरी खिड़की बड़ी करके धरायी जाती हैं.

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण दशमीSaturday, 08 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण दशमी Saturday, 08 August 2026                      आज सखी गोकुलचंद बिराजे । न्हेनी न्हेनी बूँदन बरखन लाग्यो मंद...