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Friday, 12 June 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी Saturday, 13 June 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी 
Saturday, 13 June 2026

मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगार

श्रीजी में
प्रातः - जय गोपाल (कुंडवारा) मनोरथ 
प्रियाजी में
प्रातः - फल और फूल का बंगला / सघन कुंज का मनोरथ 

कीर्तन – (राग : सारंग)

गोविंद लाडिलो लडबोरा l
अपने रंग फिरत गोकुलमें श्यामवरण जैसे भोंरा ll 1 ll
किंकणी कणित चारू चल कुंडल तन चंदन की खोरा l
नृत्यत गावत वसन फिरावत हाथ फूलन के झोरा ll 2 ll
माथे कनक वरण को टिपारो ओढ़े पिछोरा l
‘परमानंद’ दास को जीवन संग दिठो नागोरा ll 3 ll 

 साज - आज श्रीजी में भूल-भुलैया के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – श्रीजी को आज बसरा के मोती का मल्लकाछ एवं पटका धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को श्रीकंठ का शृंगार छेड़ान (हल्का) बाक़ी मध्य का (घुटने तक) ऊष्णक़ालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोतियों के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर टिपारा का साज (बसरा के मोती की टिपारा की टोपी के ऊपर मध्य में मोती की मोरशिखा और दोनों ओर दोहरा कतरा) तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
हांस, त्रवल, पायल कड़ा हस्तसाखलाआदि धराये जाते हैं. श्रीकंठ में श्वेत माला धरायी जाती है. श्वेत पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में कमल के फूल की छड़ी, सुवा के वेणुजी तथा दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उष्णकाल का व गोटी हक़ीक की आती है. 

Thursday, 11 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशीFriday, 12 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी
Friday, 12 June 2026

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर सेहरा के श्रृंगार 

आज के मनोरथ 

राजभोग में गंगा जमुना का बंगला 
शाम को सावन भादो का मनोरथ 

दिन दुल्हे तेरे सोहे शीश सुहावनो ।
मणि मोतिन को शेहरो सोहे बसियो मन मेरे ।।१।।
मुख पून्यो को चंद है मुक्ताहल तारे । 
उन के नयन चकोर हैं, ऐ सब देखन हारे ।।२।।
पिय बने प्यारि, अति सुंदर बनि आय । 
परम आगरी रूप नागरी ऐ सब देखन आई ।।३।। 
दुलहनि रेन सुहाग की, दुलह सुंदर वर पायो । 
श्रीनंदलाल को शेहरो, जन परमानंद यश गायो ।।४।।

राजभोग दर्शन – (राग : सारंग)

आज बने गिरिधारी दुल्हे चंदनको तनलेप कीये l
सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल हिये ll 1 ll
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा मोतिन सहरो सीस धरे l
रातै नैन बंक अनियारे चंचल अंजन मान हरे ll 2 ll
ठाडे कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकन बिंद परे l
‘सूरदास’ प्रभु मदन मोहन मिल राधासों रति केल करे ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में सेहरा का श्रृंगार धराये श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं मंगलगान करती व्रजगोपियों के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का पिछोड़ा धराया गया है.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य से दो अंगुल नीचे (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया गया है. मोती के के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग के दुमाला के ऊपर मोती का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये हैं. दायीं ओर सेहरे की मोती की चोटी धरायी गयी है. श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये हैं.
श्रीकंठ में कली आदि सब माला धरायी जाती है. आज हांस-त्रवल नहीं धराये जाते. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में दो कमल की कमलछड़ी, जड़ाव मोती के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का, गोटी राग-रंग की, आरसी श्रृंगार में पीले खंड की व राजभोग में सोने की डांडी की आती है.

Wednesday, 10 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशीThursday, 11 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
Thursday, 11 June 2026

चंदनी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्रा के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - चाँदी का बंगला 
शाम को - आवत मोहन धेनु लिए 
प्रियाजी में
प्रातः - बिराजत सघन कुंज की ओट 
शाम को - गोरवर्धन ते आई गाय सब 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में गौचारण के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज प्रभु को चंदनी रंग की मलमल धोती एवं पटका धराया जाता हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर चंदनी रंग के चिनमा पगा के ऊपर सिरपैंच, लूम, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल के राग-रंग का एवं गोटी हक़ीक की आती हैं.

Tuesday, 9 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी Wednesday, 10 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी 
Wednesday, 10 June 2026

गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - चंदन पहर नाव हरि बैठे 
प्रियाजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - श्याम यमुना बीच खेवत नाव 

राजभोग दर्शन –

बैठै घनस्याम सुंदर खेवत है नाव।
आज सखी मोहन संग , खेलवे को दाव।।१।।
यमुना गम्भीर नीर, अति तरंग लोले। 
गोपिन प्रति कहन लागे, मीठे मृदु बोले।। २।। 
पथिक हम खेवट तुम , लीजिये उतराई। 
बीच धार मांझ रोकी , मिष ही मिष डुलाई ।। ३।। 
डरपत हों स्याम सुंदर, राखिये पद पास।
याहि मिष मिल्यो चाहे, परमानंद दास।।। ४।। 

साज – आज श्रीजी में उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर-घाट, राजमहल, नौका-विहार, घूमर नृत्य करती गोपियों, श्री ठाकुर जी, श्री बलदेव जी एवं श्री नंद-यशोदा जी के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल की परदनी धरायी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण हीरा के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छोर वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की घुमावदार चमकानी गोल-चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
हरे एवं कमल के पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है वहीँ श्वेत पुष्पों एवं कमल की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.

Sunday, 7 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी Monday, 08 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी 
Monday, 08 June 2026

श्वेत धोती, गाती का पटका एवं श्रीमस्तक पर श्वेत घेरा के श्रृंगार 
           
श्रीजी में
प्रातः - श्वेत कमल मंडली 
शाम - मचक मचक झूले 
प्रियाजी में
प्रातः - कली की मंडली 
शाम - यमुना पुलीन हिंडोलना 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

आज ठाड़े लाल मुकुट धरे l
वदन लसत मकराकृत कुंडल रतिपति मन जु हरे ll 1 ll
अरुन अधर और चिबुक चारु बन्यो दुलरी मोहन माल गरे l
अति सुगंध और चंदन खोर किये पहोंची मोतीन की लरे ll 2 ll
कर मुरली कटि लाल काछनी किंकणी नूपुर शब्द करे l
गुन भरे ‘कृष्णदास’ प्रभु राधा निरख नेन ईत ऊत न टरे ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में मोर के भाव की श्वेत जाली की कलात्मक पिछवाई धरायी जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को श्वेत मलमल धोती एवं गाती का पटका धराया जाता हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर कूल्हे पर रूपहरा घेरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
श्रीकंठ में कली आदि सभी माला धरायी जाती हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर, कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की बड़ी आती है.

Saturday, 6 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी Sunday, 07 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी 
Sunday, 07 June 2026

शरबती मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - चंदन महल बन्यो अति सुंदर 
शाम - छूटत फुवारे आगे निके 
प्रियाजी में
प्रातः - बगीचे में पलना 
शाम - रंग महल में बैठे पिय प्यारी 

राजभोग दर्शन – 

साज – (राग : रामकली)

मोहन देहो बसन हमारे ।
जाय कहों ब्रज्पतिजू के आगे,
करत अनीत ललारे ॥ १ ॥
तुम ब्रजराज कुमार लाडिले,
और सबहिन के प्राण पियारे ।
गोविन्द प्रभु पिया दासी तिहारी,
सुंदर वर सुकुमारे ॥ २ ॥

साज – आज श्रीजी में चीरहरण के भाव की चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को शरबती मलमल का पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का छेड़ान का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 

श्रीमस्तक पर शरबती रंग के ग्वाल पगा पर मोती की लड़, पगा चंद्रिका (मोरशिखा) एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं इसी प्रकार की एक कमल माला हमेल की भांति धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का एवं गोटी बाघ बकरीं की आते हैं.

Friday, 5 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठीSaturday, 06 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी
Saturday, 06 June 2026

चंदनी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार
           
श्रीजी में
प्रातः - छाक लिए श्याम बुलावत, चंदन की गोली 
शाम - बृज ही में करत विहार , कली के श्रृंगार 
प्रियाजी में
प्रातः - लीजे लालन अपनी छाक 
शाम - फल की हटड़ी 

आज प्रभु के श्रीअंगों (वक्षस्थल, दोनों श्रीहस्त और दोनों चरणकमल) में कुल पांच केशर बरास मिश्रित चंदन की गोलियां धरायी जाती है.

राजभोग दर्शन –

साज – (राग : सारंग)

चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में छाक लीला के भाव की पिछवाई धरायी जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी मलमल का आड़बंद धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. 
गुलाबी एवं श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.

श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी Saturday, 13 June 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी  Saturday, 13 June 2026 मल्लकाछ टिपारा का श्रृंगार श्रीजी में प्रातः - जय गोपाल (कुंडवारा) मनोरथ...