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Saturday, 30 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमाSunday, 31 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा
Sunday, 31 May 2026

राजभोग में छप्पनभोग मनोरथ (बड़ा मनोरथ)
शाम को शोभित नव कुंजन की छवि भारी 

मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में छप्पनभोग के भोग साजे जाते हैं अतः श्रीजी में मंगला के पश्चात सीधे राजभोग अथवा छप्पनभोग (भोग सरे पश्चात) के दर्शन ही खुलते हैं.
श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी व शाकघर में सिद्ध चार विविध प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं.
राजभोग की अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता एवं सखड़ी में मीठी सेव, केसरयुक्त पेठा व पाँच-भात (मेवा-भात, दही-भात, राई-भात, श्रीखंड-भात, वड़ी-भात) अरोगाये जाते हैं. 

छप्पनभोग दर्शन में प्रभु सम्मुख 25 बीड़ा सिकोरी (सोने का जालीदार पात्र) में रखे जाते है.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

मदन गोपाल गोवर्धन पूजत l
बाजत ताल मृदंग शंखध्वनि मधुर मधुर मुरली कल कूजत ll 1 ll
कुंकुम तिलक लिलाट दिये नव वसन साज आई गोपीजन l
आसपास सुन्दरी कनक तन मध्य गोपाल बने मरकत मन ll 2 ll
आनंद मगन ग्वाल सब डोलत ही ही घुमरि धौरी बुलावत l
राते पीरे बने टिपारे मोहन अपनी धेनु खिलावत ll 3 ll
छिरकत हरद दूध दधि अक्षत देत असीस सकल लागत पग l
‘कुंभनदास’ प्रभु गोवर्धनधर गोकुल करो पिय राज अखिल युग ll 4 ll

साज – आज श्रीजी में चितराम की गायों के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र - श्रीजी को आज शरबती मलमल का छापा का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.

श्रीमस्तक पर केसरी रंग की टिपारे की टोपी के ऊपर गुलाबी रंग के रूपहरी किनारी वाले गौकर्ण पर सुनहरी घेरा धराया है. श्रीकर्ण में मोती के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 

 बायीं ओर मोती की चोटी धरायी जाती है.
 कली, तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं. 
पट ऊष्णकाल का एवं गोटी बाघ बकरी की आती है.

Friday, 29 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी Saturday, 30 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी 
Saturday, 30 May 2026

चंदनी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के शृंगार,

आज के मनोरथ 

राजभोग में चितराम का बंगला 
शाम को ललित लाल को सेहरों 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

 साज – आज श्रीजी में चंदनी मलमल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.

वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी रंग की मलमल की गोल छोर वाली रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित परधनी धरायी जाती है.

शृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर चंदनी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 

श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.

 श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

Thursday, 28 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी Friday, 29 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी Friday, 29 May 2026

आड़बंद श्वेत मलमल का 

कीर्तन –मंगला दर्शन (राग : रामकली)

फलफलित होय फलरूप जाने 

Wednesday, 27 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशीThursday, 27 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण द्वादशी
Thursday, 27 May 2026

बसरा के मोतियों से गूंथा हुआ आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग और मोती के दोहरा क़तरा के श्रृंगार

आज के मनोरथ 

राजभोग में सीप का बंगला 
शाम को कमल तलाई 

शृंगार दर्शन – 

कीर्तन – (राग : बिलावल)

देखे री हरि नंगमनंगा l
जलसुत भूषन अंग विराजत बसन हीन छबि उठि तरंगा ll 1 ll
अंग अंग प्रति अमित माधुरी निरखि लज्जित रति कोटि अनंगा l
किलकत दधिसुत मुख लेपन करि ‘सूर’ हसत ब्रज युवतिन संगा ll 2 ll

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

सूर आयो सिर पर छाया आई पायनतर
पंथी सब झूक रहे देख छांह गहरी l
धंधीजन धंध छांड रहेरी धूपन के लिये
पशु-पंछी जीव जंतु चिरिया चूप रही री ll 1 ll
व्रज के सुकुमार लोग दे दे किंवार सोये 
उपवन की ब्यार तामें सुख क्यों न लहेरी l
‘सूर’ अलबेली चल काहेको डरात है
महा की मधरात जैसी जेठ की दुपहरी ll 2 ll  

साज – आज श्रीजी में श्वेत रंग की (Net) जाली की कमल के फूल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है. 

वस्त्र – आज श्रीजी को बसरा के मोतियों से गूंथा हुआ आड़बंद धराया जाता है. 

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
सर्व आभरण मोती के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर बसरा के मोतियों की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोती का दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत पुष्पों की दो मालाएँ हमेल की भांति धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी,मोती के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.

Tuesday, 26 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (रमा एकादशी व्रत)Wednesday, 27 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (रमा एकादशी व्रत)
Wednesday, 27 May 2026

चंदनी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर तुर्रा का श्रृंगार

आज के मनोरथ 

राजभोग में चंदन की चोली कली के आभरण दानगढ़ मानगढ 
शाम को आज नवनिकुंज अति शोभा 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में निकुंज के भाव की चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज श्रीजी को चंदन रंग की मलमल का पिछोड़ा एवं चंदन की चोली धराये है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छेड़ान का (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर तुर्रा धराये हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये हैं. पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरियां के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

Monday, 25 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को Tuesday, 26 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (प्रथम) व्रत की एकादशी कल 27 मई को 
Tuesday, 26 May 2026

अंगूरी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर तुर्रा का श्रृंगार

आज के मनोरथ 

राजभोग में फलफूल की मंडली 
शाम को फ़लफ़ूल का हिंडोलना 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में अंगूरी मलमल की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज श्रीजी को अंगूरी रंग की मलमल का पिछोड़ा धराया है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छेड़ान का (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर कतरा धराये हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये हैं. पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, सूवा वाले वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये हैं. पट ऊष्णकाल का व गोटी राग रंग की है.

Sunday, 24 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी Monday, 25 May 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल दशमी 
Monday, 25 May 2026

श्वेत मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर श्वेत छज्जेदार पाग पर तुर्रा के श्रृंगार 

संध्या-आरती के उपरांत ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान 

आज के मनोरथ 

राजभोग में "सुंदर तिबारो खस खाने को" 
शाम को चीरहरण का मनोरथ 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

 साज - श्रीजी में आज ख़सखाना की तिबारी के चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत रंग की मलमल की गोल छोर वाली रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित परधनी धरायी जाती है.

शृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर श्वेत रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 

श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.

श्रीकंठ में मोती का चोलड़ा धराया जाता हैं.
 श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी छोटी हकीक की आती है.

ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान 

आज श्रीजी में संध्या-आरती के उपरांत ऊष्णकाल का प्रथम शीतल जल स्नान होगा. ऊष्णकाल के ज्येष्ठ और आषाढ़ मास में श्रीजी में नियम के चार अभ्यंग स्नान और तीन शीतल जल स्नान होते हैं. यह सातो स्नान ऊष्ण से श्रमित प्रभु के सुखार्थ होते हैं. 

अभ्यंग स्नान प्रातः मंगला उपरांत और शीतल जल स्नान संध्या-आरती के उपरांत होते हैं. 

अभ्यंग स्नान में प्रभु को चंदन, आवंला एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है जबकि शीतल स्नान में प्रभु को बरास और गुलाब जल मिश्रित सुगन्धित शीतल जल से स्नान कराया जाता है.

जिस दिन अभ्यंग और शीतल स्नान हो उस दिन शयनभोग की सखड़ी में विशेष रूप से विविध प्रकार के मीठा-रोटी, दहीभात, घुला हुआ सतुवा आदि अरोगाये जाते हैं.

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमाSunday, 31 May 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा Sunday, 31 May 2026 राजभोग में छप्पनभोग मनोरथ (बड़ा मनोरथ) शाम को शोभित नव कुंजन की छवि भारी  मणिकोठा,...