Friday, 30 April 2021
व्रज - वैशाख कृष्ण पंचमी
Thursday, 29 April 2021
व्रज - वैशाख कृष्ण चतुर्थी
Wednesday, 28 April 2021
व्रज - वैशाख कृष्ण तृतीया
Monday, 26 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल पूर्णिमा
Sunday, 25 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्दशी
Saturday, 24 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल त्रयोदशी
Friday, 23 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल द्वादशी
Thursday, 22 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल एकादशी
व्रज - चैत्र शुक्ल एकादशी
Friday, 23 April 2021
कामदा एकादशी, श्री महाप्रभुजी के उत्सव की बधाई बैठे, बालभाव के श्रृंगार आरंभ
विशेष - आज कामदा एकादशी है.
आज से श्रीजी में श्री महाप्रभुजी के उत्सव की बधाई पंद्रह दिवस की बैठती है. अगले पंद्रह दिवस श्री महाप्रभुजी की एवं जन्माष्टमी की बधाईयाँ गायी जातीं हैं.
आज से प्रभु को बालभाव के श्रृंगार धराये जाते हैं. जैसे श्रृंगार हो उस भाव के बधाई के कीर्तन गाये जाते हैं.
आज से आगामी पंद्रह दिन तक श्याम, बादली, नीले आदि अमंगल रंगों के वस्त्र नहीं धराये जाते हैं एवं इस अवधि में अशुभ में गये सेवक की दंडवत (सेवा में पुनः प्रवेश) भी वर्जित होती है.
प्राकट्योत्सवों के पूर्व बधाई बैठने के कारण कुछ यूं है कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ उसके पूर्व ब्रह्माजी, इन्द्र, शिवजी आदि सभी देवों द्वारा देवकीजी के गर्भ में विराजित प्रभु की स्तुति की गयी थी तब प्रभु का प्राकट्य हुआ. इस प्रकार पहले बधाई बैठती है, बधाईयाँ गायी जाती हैं और प्रभु की वंदना करने, गुणगान करने से प्रभु अवतरित होते हैं.
महाप्रभुजी के उत्सव की पंद्रह दिवस की बधाई बैठने का एक प्रमुख कारण यह है कि श्री महाप्रभुजी के लौकिक पिता श्री लक्ष्मणभट्टजी को उनके द्वारा किये सौ सोमयज्ञों के फलस्वरुप प्रभु ने रामनवमी के दिन स्वप्न में माला-बीड़ा देकर आज्ञा की थी कि मैं तुम्हारे घर प्रकट होने वाला हूँ.
इस भाव से श्री महाप्रभुजी के उत्सव की बधाई पंद्रह दिवस पूर्व बैठती है.
सेवा क्रम - उत्सव की बधाई बैठने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.
दो समय आरती थाली में की जाती है.
पिछवाई पलना के भाव के चित्रांकन की, नियम के घेरदार वस्त्र एवं श्रृंगार धराये जाते हैं जिनका वर्णन नीचे दिया गया है.
राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है.
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : आसावरी)
धन्य यशोदा भाग्य तिहारो जिन ऐसो सुत जायो l
जाके दरस परस सुख उपजत कुलको तिमिर नसायो ll 1 ll
विप्र सुजन चारन बंदीजन सबै नंदगृह आये l
नौतन सुभग हरद दूब दधि हरखित सीस बंधाये ll 2 ll
गर्ग निरुप किये सुभ लच्छन अविगत हैं अविनासी l
‘सूरदास’ प्रभुको जस सुनिकें आनंदे व्रजवासी ll 3 ll
साज – आज श्रीजी में श्वेत रंग की प्रभु को पलना झुलाते पूज्य गौस्वामी बालकों के चित्रांकन की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – श्रीजी को आज लाल रंग की मलमल का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं कटि-पटका धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर लाल रंग की गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, जड़ाव की गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में कर्णफूल गुलाब के पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, हरे मीना के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट लाल, गोटी चांदी की आती है.
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Monday, 19 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल अष्टमी
Saturday, 17 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल षष्ठी
Friday, 16 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल पंचमी
Thursday, 15 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्थी
Wednesday, 14 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया
Tuesday, 13 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल द्वितीया
Monday, 12 April 2021
व्रज - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा २०७८
Saturday, 10 April 2021
व्रज - चैत्र कृष्ण अमावस्या (प्रथम)
Friday, 9 April 2021
व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्दशी
Thursday, 8 April 2021
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Wednesday, 7 April 2021
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Tuesday, 6 April 2021
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Monday, 5 April 2021
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Sunday, 4 April 2021
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Saturday, 3 April 2021
व्रज - चैत्र कृष्ण अष्टमी
Friday, 2 April 2021
व्रज - चैत्र कृष्ण सप्तमी (षष्ठी क्षय)
Thursday, 1 April 2021
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