श्याम सुन्दर श्री जमुने महरानी की जय ...
(झारीजी भरते समय बोलने का श्लोक)
प्रियारति श्रमहरं सुगन्धि परिशीतलं,
यामुनंवारि पात्रेस्मिन भव श्रीकृष्ण तापहृत
इदंपानीय पात्रंहि व्रजनाथाय कल्पितं,
व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी Saturday, 27 June 2026 नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गिरिधारीजी महाराज श्री (वि.सं.१८९९) का उत्सव केसरी ध...
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