श्याम सुन्दर श्री जमुने महरानी की जय ...
(झारीजी भरते समय बोलने का श्लोक)
प्रियारति श्रमहरं सुगन्धि परिशीतलं,
यामुनंवारि पात्रेस्मिन भव श्रीकृष्ण तापहृत
इदंपानीय पात्रंहि व्रजनाथाय कल्पितं,
व्रज – विस २०८३ श्रावण शुक्ल द्वितीया Friday, 14 August 2026 लाल पीले लहरियाँ का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर दुमाला पर कलगा (भीमसेनी क़तरा) के...
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