।।श्री हरि।।
।।श्री गोवर्धननाथो विजयते।।
अथ अष्टसखा तथा अष्ट समय के दर्शन को भाव लिख्यते
मंगला के दर्शन को भाव
प्रथम दर्शन मंगला कौ तामें श्री नवनीतप्रियजी को भाव। परमानन्ददास कीर्तन करे।। सारस्वत कल्प में दिन में तो तोष सखा रात्रि के विहार में चन्द्र सहचरी, तिनको श्री नवनीतप्रियजी में दर्शन में आसक्ति।। ग्वाल पगा की सिंगार तिनकी ओरको।। तिनकों बाललीला को अनुभव श्रवण स्थान में प्रगट मंगला के दर्शन में मुख्य-भाव सुरभीकुंड के ऊपर स्याम तमाल के नीचें श्री गिरिराज में निवास।।१।।
सिंगार के दर्शन को भाव
सो सिंगार के दर्शन में श्री गोकुलचंद्रमाजी के दर्शन कौ भाव नन्ददासजी कीर्तन करै सारस्वतकल्प में दिवस मैं तौ भोज सखा और रात्रि के विहार में नई इन्द्र सहचरी श्री गोकुलचंद्रमाजी के दर्शन में आसक्ति तिनकी और को सिंगार फेंटा कौ, तिनको रासपंचाध्यायी की लीला में अनुभव उदर स्थान मेंते प्रागट्य सिंगार के दर्शन में मुख्य भाव मानसी गंगा के ऊपर पीपर के पेड़ के नीचे श्री गिरिराज में निवास।।२।।
ग्वाल के दर्शन को भाव
ग्वाल के दर्शन में श्री द्वारिकानाथजी के दर्शन कौ भाव गोविंदस्वामी कीर्तन करें, सारस्वत कल्प में दिवस में तौ श्री दामा सखा और रात्रि के विहार में भामा सहचरी, तिनकी श्री द्वारिकाधीशजी के स्वरूप में आसक्ति तिनकी और कौ सिंगार टिपारा कौ, तिनको हिंडोरा की लीला कौ अनुभव नेत्रन में ते प्रगट ग्वाल के दर्शन में मुख्य भाव तिनकौ निवास गोविंदस्वामी की कदमखंडी में ऐरावत कुंड के ऊपर श्री गिरिराज में निवास।।३।।
राजभोग के दर्शन को भाव
सो श्रीनाथजी के दर्शन कौ भाव श्रीकुंभनदासजी कीर्तन करें, सारस्वत कल्प में दिवस में तौ अर्जुन सखा और रात्रि के विहार में विसाखा सहचरी तिनकी श्री गोवर्धननाथजी के दर्शन में आसक्ति तिनकी आडी कौ सिंगार कुल्है कौ निकुंज लीला कौ अनुभव हृदय स्थान में ते प्रागट्य राजभोग के दर्शन में मुख्य भाव और आन्योर में सदू पांडे के नीम के वृक्ष नीचें श्री गिरिराज में निवास।।४।।
उत्थापन को भाव
सो उत्थापन में श्री मथुरेशजी दर्शन देंय और सूरदासजी कीर्तन करें। सारस्वत कल्प में दिवस में तौ कृष्णसखा और रात्रि के विहार में चंपकलता सहचरी तिनकी श्री मथुरानाथजी के स्वरूप में आसक्ति तिनकी और कौ सिंगार पाग कौ तिनकी मानलीला कौ अनुभव, मुखारविंद में सूं प्रागट्य तिनकौ उत्थापन दर्शन में मुख्य भाव सघन कंदरा परासौली में चन्द्र सरोवर के ऊपर श्रीगिरिराज में निवास।।५।।
भोग समय के दर्शन को भाव
सो भोग के समय के दर्शन में श्री गोकुलनाथजी दर्शन देंइ, चतुर्भुजदासजी कीर्तन करें, सारस्वत कल्प में दिवस में तौ सुबाहु सखा और रात्रि के विहार में सुशीला सहचरी, तिनकी श्री गोकुलनाथजी के स्वरूप में आसक्ति तिनकी और कौ सिंगार सेहरा कौ तिनकों अन्नकूट की लीला कौ अनुभव हृदय स्थान में ते प्रागट्य भोग के दर्शन में मुख्य भाव रुद्रकुंड ऊपर इमली के नीचे नये कुंड के पास श्री गिरिराज में निवास।।६।।
संध्या आरती के दर्शन को भाव
सो संध्या आरती के समय श्री विट्ठलनाथजी दर्शन देंय हैं, और छीतस्वामी कीर्तन करें, सारस्वत कल्प में दिवस में तो सुबल सखा और रात्रि के विहार में पद्मा सहचरी तिनकी श्री विट्ठलनाथजी के दर्शन में आसक्ति तिनकी और कौ सिंगार दुमालौ श्रीगुसांईजी की जन्मलीला कौ अनुभव कटिस्थान में ते प्रागट्य संध्या आरती के दर्शन में मुख्य भाव अपछरा कुंड के ऊपर स्यामतमाल के नीचें श्री गिरिराज में निवास।।७।।
सेंन के दर्शन को भाव
आठमों दर्शन सेंन की तामें श्री मदनमोहनजी के स्वरूप कौ भाव कृष्णदास अधिकारी कीर्तन करें, सारस्वत कल्प में दिवस में तौ ऋषभ सखा और रात्रि के विहार में ललिता सहचरी तिनकी श्री मदनमोहनजी के स्वरूप में आसक्ति तिनकी और कौ सिंगार, मुकुट कौ तिनकों रासलीला कौ अनुभव चरण स्थान में सों प्रागट्य सेंन के दर्शन में मुख्य भाव बिलछूकुंड के ऊपर स्याम तमाल तथा कदंब के वृक्ष के नीचे श्री गिरिराज में निवास।।८।।
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