By Vaishnav, For Vaishnav

Thursday, 15 October 2020

कृष्णपरता

कृष्णपरता

श्रीमहाप्रभुजी कहते है कि तुम भी अपने घर मे श्रीकृष्ण का स्वरूप जो तुम्हे सुंदर लगता हो उसे पधराओ और वह स्वरूप जब तुम्हारे  घर मे पधारे तो उसे अपने परिवार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मानो.

अपने जीवन की समस्त क्रियाओ और व्यवहारों जैसे कि सोना-जागना, कमाना-खाना, स्नेह-उपेक्षा आदि को अपने घर में बिराजते कृष्ण स्वरूप की ओर मोड़ दो. 

अपनी समस्त वृत्तियों का विषय-प्रयोजन अपने सेव्य श्रीकृष्ण को बनाओ. 

सुबह जागो कृष्ण को जगाने लिये, नहाओ उसे नहलाने के लिये, रसोई बनाओ उसे भोग धरने के लिये, काम-धंधा द्वारा कमाने जाओ तो अपने इस कृष्णकेन्द्रित संसार को चलाने के लिये, विवाह करो कृष्णसेवा में सहयोगी की कामना से, संतति पैदा करो किन्तु इस कृष्णकेन्द्रित परिवार की वृद्धि की कामना से और रात्रि में शयन भी करो तो कृष्ण के सपनों में खोने के लिये. 

यह कृष्णपरता, यदि सेवाकर्ता से जीवन मे निभ पाये तो हमारी नि:साधनता ही इस पुष्टि के मैदान में पुष्टिभक्ति का रूप धारण कर लेगी.

https://m.facebook.com/PushtiSaaj/

No comments:

Post a Comment

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशीSaturday, 27 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी Saturday, 27 June 2026 नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गिरिधारीजी महाराज श्री (वि.सं.१८९९) का उत्सव केसरी ध...