By Vaishnav, For Vaishnav

Monday, 23 June 2025

व्रज – आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी

व्रज – आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी 
Tuesday, 24 June 2025

केसरी मलमल का पिछोड़ा और दुमाला पर मोती के सेहरा के श्रृंगार

राजभोग दर्शन – (राग : सारंग)

आज बने गिरिधारी दुल्हे चंदनको तनलेप कीये l
सकल श्रृंगार बने मोतिन के विविध कुसुम की माल हिये ll 1 ll
खासाको कटि बन्यो है पिछोरा मोतिन सहरो सीस धरे l
रातै नैन बंक अनियारे चंचल अंजन मान हरे ll 2 ll
ठाडे कमल फिरावत गावत कुंडल श्रमकन बिंद परे l
‘सूरदास’ प्रभु मदन मोहन मिल राधासों रति केल करे ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में सेहरा का श्रृंगार धराये श्री स्वामिनीजी, श्री यमुनाजी एवं मंगलगान करती व्रजगोपियों के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी मलमल  का मलमल का पिछोड़ा एवं अंतरवास का राजशाही पटका धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर केसरी दुमाला के ऊपर मोती का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. दायीं ओर सेहरे की मोती की चोटी धरायी जाती है. 
श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. 
कली आदि की माला श्रीकंठ में धरायी जाती है. श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी भी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, गंगा जमुनी के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सुवा वाला व एक चांदी की) धराये जाते हैं.
पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के आते हैं.

No comments:

Post a Comment

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशीSaturday, 27 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी Saturday, 27 June 2026 नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गिरिधारीजी महाराज श्री (वि.सं.१८९९) का उत्सव केसरी ध...