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Thursday, 16 April 2026

व्रज - वैशाख कृष्ण अमावस्या

व्रज - वैशाख कृष्ण अमावस्या
Friday, 17 April 2026

केसरी धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के शृंगार

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

आज बने नंदनंदनरी नव चंदनको तन लेप किये l
तामे चित्र बने केसर के राजत हैं सखी सुभग हिये ll 1 ll
तन सुखको कटि बन्यो हे पिछोरा ठाड़े है कर कमल लिये l
रूचि वनमाल पीत उपरेना नयन मेन सरसे देखिये ll 2 ll
करन फूल प्रतिबिंब कपौलन मृगमद तिलक लिलाट दिये l
‘चतुर्भुज’ प्रभु गिरिधरन लाल छबि टेढ़ी पाग रही भृकुटी छिये ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी-तकिया एवं चरण चौकी के ऊपर सफेद बिछावट होती है. 

वस्त्र – आज श्रीजी को केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र फ़िरोज़ी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को उष्णकाल का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फ़िरोज़ा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर केसरी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, उष्णकाल के फ़िरोज़ी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट केसरी का एवं गोटी चाँदी की आती हैं.

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