By Vaishnav, For Vaishnav

Thursday, 7 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल सप्तमी

व्रज - चैत्र शुक्ल सप्तमी
Friday, 08 April 2022

स्याम चुंदड़ी का सूथन चोली तथा खुलेबंद के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के शृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं. 
ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा एवं प्रभु के तत्सुख की भावना से मुखियाजी के स्व-विवेक के आधार पर धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को स्याम चुंदड़ी के खुलेबंध के चाकदार वागा एवं चोली का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

नयनन लागी हो चटपटी l
मदनमोहन पिय नीकसे द्वार व्है, शोभित पाग लटपटी ll 1 ll
दूर जाय फीर चितयेरी मो तन, नयन कमल मनोहर भृकुटी l
'गोविंद' प्रभु पिय चलत ललित गति, कछुक सखा अपनी गटी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में स्याम चुंदड़ी की सुनहरी तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को स्याम चुंदड़ी का सूथन, चोली एवं खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं.  सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर स्याम चुंदड़ी की छज्जेदार  पाग के ऊपर सिरपैंच, जमाव का कतरा,तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल के दो जोड़ी धराये जाते हैं.
 श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट स्याम व गोटी चाँदी की आती है.

Wednesday, 6 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल षष्ठी

व्रज - चैत्र शुक्ल षष्ठी
Thursday, 07 April 2022

चतुर्थ (काजली, श्याम अथवा केसरी) गणगौर

विशेष – आज काजली (श्याम) गणगौर है और श्री यमुनाजी के भाव की है अतः इसे घर की गणगौर भी कहा जाता है. नाथद्वारा में आज मेला गणगौर बाग़ के स्थान पर मोतीमहल में और उसके बाहर चौपाटी बाज़ार में आयोजित किया जाता है.

आज श्रीजी में श्री गुसांईजी के छठे लालजी श्री यदुनाथजी का उत्सव होता है अतः आज गणगौर काजली (श्याम) के स्थान पर केसरी रंग की मानी गयी है.

सेवाक्रम - उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.
दिन में सभी समय झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. दो समय की आरती थाली में की जाती है.

उत्सव के कारण गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में मेवा युक्त बूंदी के लड्डू अरोगाये जाते हैं. 
इसके अतिरिक्त प्रभु को दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी का भोग भी अरोगाया जाता है. राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता अरोगाया जाता है.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

सेवककी सुखराशि सदा श्री वल्लभ राजकुमार l
दरसन ही प्रसन्न होत मन पुरुषोत्तम अवतार ll 1 ll
सुदृष्टि चित्तै सिद्धांत बतायो, लीला जग विस्तार l
ईह तजि आन, ज्ञान कहां धावत भूले कुमति विचार ll 2 ll
‘चत्रभुज’ प्रभु उद्धरे पतित श्रीविट्ठल कृपा उदार l
जाके चरन गहि भुज दृढ करी, गिरधर नंद दुलार ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में केसरी रंग की उत्सव की मलमल की, रुपहली तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. पीठिका के ऊपर कमल का काम किया हुआ है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को केसरी रंग की मलमल का सूथन चोली तथा खुलेबंद के चाकदार वागा एवं चोली धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं. 

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. माणक एवं जड़ाव स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर केसरी रंग की कुल्हे पर माणक का पान, सुनहरी घेरा एवं बायीं ओर शीशफूल और उत्सव की मीना की चोटी धरायी जाती है.
 श्रीकर्ण में माणक के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
 श्रीकंठ में कली, कस्तूरी आदि सभी माला धरायी जाती हैं.
चैत्री गुलाब के पुष्पों की सुन्दर वनमाला धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, माणक के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक सोना को) धराये जाते हैं.
पट पिला गोटी स्याम मीना की व आरसी श्रृंगार में पिले खंड की एवं राजभोग में सोना की डांडी आती है. 

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं.  कुल्हे रहे लूम-तुर्रा नहीं धराया जाता है.

Tuesday, 5 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल पंचमी

व्रज - चैत्र शुक्ल पंचमी
Tuesday, 06 April 2022

रंगीली गुलाबी गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये।
विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥
लै कर बीन बजाय गाय पिय प्यारी जेंमत रुचि उपजैये।
कृष्णदास वृषभानु सुता संग घूमर दै दै नंदनंद रिझैये॥

तृतीया (गुलाबी) गणगौर

विशेष – आज गुलाबी गणगौर है और ललिताजी के भाव की है अतः आज सर्व साज एवं वस्त्र गुलाबी घटावत धराये जाते हैं

आज के वस्त्र शीतकाल की गुलाबी घटा जैसे ही होते हैं परन्तु उन दिनों शीतकाल होने से वस्त्र साटन (Satin) के धराये जाते हैं और आज उष्णकाल के कारण मलमल के वस्त्र धराये जाते हैं. 
इसके अतिरिक्त शीतकाल की गुलाबी घटा के दिन किनारी वाले वस्त्र नहीं होते जबकि आज के वस्त्र सुनहरी ज़री की किनारी से सुशोभित होते हैं. 

प्रभु को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से चैत्री गुलाब का सीरा अरोगाया जाता है.

आज श्रीजी में नियम की चैत्री गुलाब की मंडली आती है. 
श्रृंगार समय धरायी पिछवाई ग्वाल बाद बड़ी कर (हटा) दी जाती है और चैत्री गुलाब से निर्मित मंडली (बंगला) में प्रभु विराजित होते हैं. 
मनोरथ के रूप में विविध सामग्रियां प्रभु को अरोगायी जाती हैं. राजभोग से संध्या-आरती तक प्रभु मंडली में विराजते हैं एवं आरती दर्शन के पश्चात मंडली हटा दी जाती है. 
आज विशेष रूप से प्रभु में गोखड़े (तिबारी) वाली मंडली धरायी जाती है. इस प्रकार की मंडली में श्रीजी वर्ष में केवल आज के दिन ही विराजते हैं.

शयनभोग की सखड़ी में श्री नवनीतप्रियाजी में सिद्ध होकर श्रीजी के अरोगने के लिए गुलाब का सीरा आता है.

राजभोग दर्शन -

कीर्तन – (राग : सारंग)

कमलमुख देखत कौन अघाय l
सुनही सखी लोचन अलि मेरे मुदित रहे अरुझाय ll 1 ll
सोहति मुक्तामाल श्याम तन जनु बन फूली वनराय l
गोवर्धनधर के अंग अंग पर ‘कृष्णदास’ बल जाय ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में गुलाबी रंग की मलमल की सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र भी गुलाबी रंग के धराये जाते हैं. सभी वस्त्र सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना तथा सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं. हीरे की हमेल धरायी जाती है. 
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, तथा गोल चमक की चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. 
चैत्री गुलाब के पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट गुलाबी और गोटी चांदी की आती हैं.

Monday, 4 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्थी

व्रज - चैत्र शुक्ल चतुर्थी
Tuesday, 05 April 2022

रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये।
विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥१॥
लै कर बीन बजाय गाय पिय प्यारी जेंमत रुचि उपजैये।
कृष्णदास वृषभानु सुता संग घूमर दै दै नंदनंद रिझैये॥२॥

द्वितीय (हरी) गणगौर

विशेष – आज हरी गणगौर है. आज की गणगौर चन्द्रावलीजी के भाव की है अतः श्रीजी को नियम के पंचरंगी लहरिया वस्त्र धराये जाते हैं.

पहली तीनों गणगौरों (चूंदड़ी, हरी व गुलाबी) में रात्रि के अनोसर में श्रीजी को सूखे मेवे (बादाम, पिस्ता, काजू, किशमिश, चिरोंजी आदि), खसखस, मिश्री की मिठाई के खिलौने, ख़ासा भण्डार में सिद्ध मेवा-मिश्री के लड्डू, माखन-मिश्री आदि से सज्जित थाल अरोगाया जाता है.

कीर्तन – (राग : सारंग)

बैठे हरि राधा संग कुंजभवन अपने रंग
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई l
मोहन अति ही सुजान परम चतुर गुन निधान
जान बुझ एक तान चूकके बजाई ll 1 ll
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुन प्रवीन 
अति नवीन रूप सहित, वही तान सूनाई ll 2 ll
‘वल्लभ’ गिरिधरन लाल रिझ दई अंकमाल
कहत भले भले जु लाल सुंदर सुखदाई ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में एक ओर श्रीकृष्ण एवं दूसरी ओर श्रीबलरामजी के साथ घूमर नृत्य करती व्रजललनाओं (गोपियों) और गणगौर के सुन्दर चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पंचरंगी लहरिया का सूथन, चोली तथा खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र सफ़ेद डोरिया के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर पंचरंगी लहरिया की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, पन्ना की सीधी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में पन्ना के दो जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकंठ में त्रवल के स्थान पर पन्ना का कंठा धराया जाता है.
गुलाबी एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (एक स्वर्ण का) धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी लहरिया की आती है.

Sunday, 3 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया

व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया 
Monday, 04 April 2022

छबीली राधे,पूज लेनी गणगौर ।
 ललिता विशाखा,सब मिल निकसी,
आइ वृषभान की पोर,
सधन कुंज गहवर वन नीको,
मिल्यो नंदकिशोर ।।
" नंददास " प्रभु आये अचानक,
 घेर लिये चहुं ओर ।।

प्रथम (चुंदड़ी) गणगौर

राजस्थान का रंग-बिरंगा पर्व गणगौर आज से आरम्भ हो रहा है.
सामान्यतया राजस्थान में चार (चूंदड़ी, हरी, गुलाबी एवं काजली) गणगौर होती है.
विश्व के सभी हिस्सों में बसे राजस्थानी विवाहित स्त्रियाँ गणगौर का पूजन करती हैं.

नाथद्वारा में भी पूज्य श्रीतिलकायत के निजी आवास मोती-महल में ईशरजी व गणगौर की सुसज्जित प्रतिमाओं का पूजन किया जाता है. 

श्रीजी में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है यद्यपि गणगौर के चौथे दिन श्रीजी में श्री गुसांईजी के छठे पुत्र श्री यदुनाथजी का उत्सव होता है अतः श्रीजी में चौथी गणगौर काजली (श्याम) के स्थान पर केसरी रंग की मानी गयी है.

आज से प्रभु को चूंदड़ी व लहरिया के वस्त्र भी धराये जाने प्रारंभ हो जाते हैं. पहली गणगौर स्वामिनीजी के भाव की है अतः आज श्रीजी को लाल चूंदड़ी के खुलेबंद के चाकदार वस्त्र धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर डांख का कतरा धराया जाता है.

आज श्रीजी को विशेष रूप से चूंदड़ी के भाव से ही गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में चिरोंजी (चारोली) के लड्डू अरोगाये जाते हैं. 
चिरोंजी (चारोली) के लड्डू श्रीजी प्रभु को आज के अतिरिक्त वर्ष में चार और बार अरोगाये जाते हैं.

पहली तीनों गणगौरों (चूंदड़ी, हरी व गुलाबी) में रात्रि के अनोसर में श्रीजी को सूखे मेवे (बादाम, पिस्ता, काजू, किशमिश, चिरोंजी आदि), खसखस, मिश्री की मिठाई के खिलौने, ख़ासा भण्डार में सिद्ध मेवा-मिश्री के लड्डू, माखन-मिश्री आदि से सज्जित थाल अरोगाया जाता है.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

कुंवर बैठे प्यारीके संग अंग अंग भरे रंग,
बल बल बल बल त्रिभंगी युवतीन के सुखदाई l
ललित गति विलास हास दंपती मन अति हुलास
विगलित कच सुमनवास स्फुटित कुसुम निकट तैसीये सरद रेन सुहाई ll 1 ll
नवनिकुंज भ्रमरगुंज कोकिला कल कूजन पुंज
सीतल सुगंध मंद बहत पवन सुखदाई l
‘गोविंद’ प्रभु सरस जोरी नवकिशोर नवकिशोरी
निरख मदन फ़ौज मोरी छेल छबीलेजु नवलकुंवर व्रजकुल मनिराई ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज लाल रंग की चौफूली चूंदड़ी की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को लाल रंग की चौफूली चूंदड़ी का सूथन, चोली एवं खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र सूवापंखी (तोते के पंख जैसे हल्के हरे रंग) रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. छेड़ान के हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल रंग की चौफूली चूंदड़ी की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम-तुर्री रूपहरी, डांख का नागफणी (जमाव) का कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में हीरा के चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
चैत्री गुलाब के पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट लाल व गोटी मीना की चूंदड़ी भांत की आती है.

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराया जाता है.

Saturday, 2 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल द्वितीया

व्रज - चैत्र शुक्ल द्वितीया 
Sunday, 03 April 2022

श्याम छापा के खुलेबंध के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा के शृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं. 
ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा एवं प्रभु के तत्सुख की भावना से मुखियाजी के स्व-विवेक के आधार पर धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को लाल रंग की धोती के ऊपर श्याम छापा के खुलेबंध के चाकदार वागा एवं चोली का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव का क़तरा का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

नयनन लागी हो चटपटी l
मदनमोहन पिय नीकसे द्वार व्है, शोभित पाग लटपटी ll 1 ll
दूर जाय फीर चितयेरी मो तन, नयन कमल मनोहर भृकुटी l
'गोविंद' प्रभु पिय चलत ललित गति, कछुक सखा अपनी गटी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में श्याम रंग के छापा की सुनहरी तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को लाल रंग की धोती के ऊपर श्याम रंग के छापा के खुलेबंध के चाकदार वागा एवं चोली धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लाल रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, जमाव का कतरा,तुर्री सुनहरी तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में दो जोड़ी कर्णफूल  धराये जाते हैं.
आज कमल माला धरावे.
 श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, स्वर्ण के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट श्याम व गोटी चाँदी की आती है.

Friday, 1 April 2022

व्रज - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा २०७९

व्रज - चैत्र शुक्ल प्रतिपदा २०७९
Saturday, 02 April 2022

चैत्र मास संवत्सर परवा, वरस प्रवेश भयो है आज l
कुंज महल बैठे पिय प्यारी, लालन पहेरे नौतन साज ll 1 ll
आपुही कुसुम हार गुही लीने, क्रीड़ा करत लाल मन भावत l
बीरी देत दास ‘परमानंद’, हरखि निरखि जश गावत ll 2 ll

आज की पोस्ट भी काफी लम्बी परन्तु आज से श्रीजी की सेवा में होने वाले परिवर्तनों की विलक्षण जानकारियों से युक्त है अतः इसे पूरा पढ़ें और उत्सव का आनंद लें.

आप सभी वैष्णवों को नव-संवत्सर २०७९ की ख़ूबख़ूब बधाई 
       
भारतीय नव-संवत्सर २०७९

विशेष – आज भारतीय नव-संवत्सर (नववर्ष) है. ऐसा कहा जाता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिवस सूर्योदय के समय श्री ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की उत्पत्ति की थी. अतः आज इस दिन को नव-संवत्सर के रूप में मनाया जाता है. 

 त्रेतायुग में आज के दिन ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था. 
आज ही के दिन २०७८ वर्ष पहिले उज्जैनी के सम्राट महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत का शुभारम्भ हुआ था.

शक्ति उपासना का पर्व चैत्री नवरात्रि आज से प्रारंभ हो जाता है.

आज के दिन मीठे नीम की कोंपलें और मिश्री का सेवन करना चाहिए. 

पुष्टिमार्ग में आज की सेवा श्री स्वामिनीजी की ओर से होती है अतः प्रभु को आज छापा के खुलेबंद के वस्त्र, श्रीमस्तक पर छापा की कुल्हे एवं मोरपंख की जोड़ धराये जाते हैं. 

देवीपूजन के जो पद आश्विन मास की नवरात्रि में गाये जाते हैं वही पद इन नौ दिनों में भी गाये जाते हैं. 

 श्रीजी में आज से सेवाक्रम में कई परिवर्तन होंगे 

  विगत कल तक मंगला में श्रीजी के श्रीअंग पर दत्तु और पीठिका पर दग्गल धरायी जा रही थी. 
आज से प्रभु के श्रीअंग पर उपरना धराया जायेगा, दग्गल पूर्ण रूप से विदा हो जाएगी. दत्तु केवल पीठिका पर धरायी जाएगी एवं श्री महाप्रभुजी के उत्सव के अगले दिन (वैशाख कृष्ण द्वादशी) से पूर्ण रूप से बड़ी कर (हटा) दी जाएगी.

 आज से श्रीजी में ज़री के वस्त्र नहीं धराये जायेंगे. मलमल पर छापा के वस्त्र आज से प्रभु को धराने प्रारंभ हो जायेंगे.

 कुछ वैष्णव मंदिरों में आज नववर्ष के अवसर पर मीठे नीम की कोमल कोंपलों के रस में मिश्री के टूक एवं इलायची पधराकर प्रभु के सम्मुख धरी जाती है यद्यपि ऐसा कोई सेवाक्रम श्रीजी में नहीं किया जाता. श्रीजी के पातल-घर में प्रशादी मिश्री की कणी और नीम की कोंपलें बाहर से लाकर रखी जाती है जिन्हें आज सेवकगण एवं वैष्णव लेते हैं.

 आज से प्रभु की शैयाजी शैया मन्दिर के स्थान पर मणिकोठा में साजी जाती है और इस कारण आज से शयन के दर्शन बाहर नहीं खोले जाते.

सेवाक्रम - उत्सव होने के कारण श्रीजी मंदिर के सभी मुख्य द्वारों की देहरी (देहलीज) को पूजन कर हल्दी से लीपी जाती हैं एवं आशापाल की सूत की डोरी की वंदनमाल बाँधी जाती हैं.
गेंद, चौगान व दिवला सभी सोने के आते हैं. राजभोग में 6 बीड़ा की शिकोरी(स्वर्ण का जालीदार पात्र) आवे. सभी जगह भाँतवार बंटा चढ़े.
  
आज दिनभर झारीजी में यमुनाजल भरा जाता है. सभी समय आरती थाल में की जाती है. आज से प्रतिदिन आरती में एक खण्ड (बाती) कम आता है.

मंगला दर्शन पश्चात प्रभु को चन्दन, आवंला, एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है.

श्रृंगार समय प्रभु के मुख्य पंड्याजी श्रीजी के सम्मुख नववर्ष का पंचांग वाचन करते हैं एवं न्यौछावर की जाती है.

श्रृंगार दर्शन 

कीर्तन – (राग : बिलावल)

नवनिकुंज देवी जय राधिका, वरदान नीको देहौ, प्रिय वृन्दावन वासिनी l
करत लाल आराधन, साधन करी प्रन प्रतीत, नामावली मंत्र जपत जय विलासीनी ll 1 ll
प्रेम पुलक गावत गुन, भावत मन आनंद भर, नाचत छबि रूप देखी मंद हासिनी l
अंगन पर भूषण पहिराई, आरसी दिखाई, तोरत तृन लेत बलाई सुख निवासीनी ll 2 ll....अपूर्ण

साज – आज श्रीजी में केसरी मलमल पर लाल छापा की हरी किनारी के हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है. सिंहासन, चरणचौकी, पडघा, झारीजी आदि स्वर्ण जड़ाव के धरे जाते हैं. प्रभु के सम्मुख चांदी के त्रस्टीजी धरे जाते हैं जो प्रतिदिन राजभोग पश्चात अनोसर में धरे जाते हैं. 

वस्त्र – श्रीजी को आज पीले छापा का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, लाल छापा की चोली एवं खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग दरियाई वस्त्र के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला (चरणारविन्द तक) का भारी श्रृंगार धराया जाता है. मिलवा – हीरा की प्रधानता, मोती, माणक, पन्ना एवं स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर लाल छापा की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, पान, टीका, दोहरा त्रवल, पांच मोरपंख की चंद्रिका की जोड़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
बायीं ओर हीरा की चोटी धरायी जाती है. श्रीकर्ण में हीरा के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
श्रीकंठ में पदक, हार, माला, दुलड़ा आदि धराये जाते हैं.
श्रीकंठ में कली, कस्तूरी आदि सभी माला धरायी जाती हैं.
चैत्री गुलाब के पुष्पों की सुन्दर वनमाला धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, हीरा के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उत्सव का, गोटी सोने की जाली वाली व आरसी श्रृंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोना की डांडी आती है. पीठिका पर लाल छापा का सेला धराया जाता है.

गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में मनोर (इलायची-जलेबी) के लड्डू अरोगाये जाते हैं. इसके अतिरिक्त प्रभु को दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी का भोग भी अरोगाया जाता है.
राजभोग की अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता, सखड़ी में मीठी सेव व केसरी पेठा अरोगाये जाते हैं.
आज भोग समय फल के साथ अरोगाये जाने फीका के स्थान पर तले सूखे मेवे की बीज-चलनी अरोगायी जाती है

सभी वैष्णवों को भारतीय नववर्ष की मंगल कामना

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या Wednesday, 12 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या  Wednesday, 12 August 2026 हरियाली अमावस्या  आज के हिंडोलना के दर्शन  आज चौक में हरे पत्तों की बिछावट ...