By Vaishnav, For Vaishnav

Thursday, 8 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी

व्रज – माघ कृष्ण चतुर्दशी 
Friday, 09 February 2024

स्याम सलीदार ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर मोर चंद्रिका के शृंगार

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को स्याम सलीदार ज़री का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर मोर चंद्रिका का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग :सारंग)

मेरी अखियन के भूषण गिरिधारी ।
बलि बलि जाऊ छबीली छबि पर अति आनंद सुखकारी ।।१।।
परम उदार चतुर चिंतामनिवदरस दरस दुं
दु़:खहारी ।
अतुल प्रताप तनक तुलसी दल मानत सेवा भारी ।।२।।
छीतस्वामी गिरिधरन विसद यश गावत गोकुलनारी ।
कहा वरनौ गुन गाथ नाथके श्रीविट्ठल ह्रदय विहारी ।।३।।

साज – श्रीजी में आज मेघस्याम ज़री की हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज स्याम सलीदार ज़री पर रूपहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. पटका मलमल का धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान के (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर स्याम ज़री की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, मोर चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में कर्णफूल की एक जोड़ी धराये जाते हैं. 
गुलाबी एव पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट स्याम व गोटी चाँदी की आती है.

Tuesday, 6 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण द्वादशी

व्रज – माघ कृष्ण द्वादशी 
Wednesday, 07 February 2024

अंगूरी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर दुरंगी पाग पर क़तरा के शृंगार

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को अंगूरी साटन का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर दुरंगी पाग पर क़तरा का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आसावरी)

जाको मन लाग्यो गोपाल सों ताहि ओर कैसें भावे हो ।
 लेकर मीन दूधमे राखो जल बिन सचु नहीं पावे हो ।।१।।
ज्यो सुरा रण घूमि चलत है पीर न काहू जनावे हो ।
ज्यो गूंगो गुर खाय रहत है सुख स्वाद नहि बतावे हो ।।२।।
जैसे सरिता मिली सिंधुमे ऊलट प्रवाह न आवे हो । 
तैसे सूर  कमलमुख निरखत चित्त ईत ऊत न डुलावे हो ।।३।।

साज – आज श्रीजी में अंगूरी रंग की रूपहरी ज़री के भरतकाम की शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज अंगूरी रंग की साटन (Satin) का सूथन, चोली, घेरदार वागा तथा मोजाजी धराये जाते हैं. घेरदार वागा, रूपहरी किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग  के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर हरे व सफ़ेद रंग की दुरंगी पाग के ऊपर सिरपैंच, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत एवं पीले एव सफ़ेद पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में लाल मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धरायी जाती हैं.   
पट अंगूरी एवं गोटी मीना की आती है.

Monday, 5 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण एकादशी

व्रज – माघ कृष्ण एकादशी 
Tuesday, 06 February 2024

आज हरि रैन उनींदे आये ।
अटपटी पाग लटपटी अलकें
भृकुटि अंग नचाये ।।१।।
अंजन अधर ललाट महावर
नयन तम्बोल खवाये ।
सूरदास कहे मोहे अचम्भो
हरि रात रात में तीन तिलक
कहांते पाये ।।२।।

षट्तिला एकादशी, डोलोत्सव का प्रतिनिधि का श्रृंगार

बड़े उत्सवों के पहले उस श्रृंगार का प्रतिनिधि का श्रृंगार धराया जाता है. 

विक्रमाब्द १९७३-७४ में तत्कालीन परचारक श्री दामोदरलालजी ने प्रभु प्रीति के कारण अपने पिता और तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी से विनती कर इस श्रृंगार की आज्ञा ली और यह प्रतिनिधि का श्रृंगार धराया था. 

तदुपरांत यह श्रृंगार प्रतिवर्ष धराया जाता है.

बसंत-पंचमी के पूर्व श्रीजी में गुलाल वर्जित होती है अतः पिछवाई एवं वस्त्रों पर सफ़ेद और लाल रंग के वस्त्रों को काट कर ऐसा सुन्दर भरतकाम (Work) किया गया है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभु ने गुलाल खेली हो.

श्रीजी को आज के दिन षट्तिला एकादशी के कारण विशेष रूप से गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में तिलवा (तिल) के बड़े लड्डू अरोगाये जाते हैं, 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सुधराई)

आज बने नवरंग छबीले डगमगात पग अंग-अंग ढीले ll 1 ll
जावक पाग रंगी धों कैसेरी जैसे करी कहो पिय तैसे ll 2 ll
बोलत वचन बहुत अलसाने पीक कपोल अधर लपटाने ll 3 ll
कुमकुम हृदय भूजन छबि वंदन ‘सूरश्याम’ नागर मनरंजन ll 4 ll

साज – आज श्रीजी में पतंगी (गुलाल जैसे) रंग की, अबीर व चूवा के भाव से सफ़ेद एवं श्याम रंग की टिपकियों के भरतकाम से डोल उत्सव सी सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. इसे देख के ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभु ने गुलाल खेली हो. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को पतंगी रंग का डोल उत्सव का सूथन, चोली, घेरदार वागा धराया जाता है. पटका मोठड़ा का धराया जाता है. सभी वस्त्र सफ़ेद अबीर एवं श्याम चूवा की टिपकियों के भरतकाम से सुसज्जित होते हैं. मोजाजी पतंगी रंग के एवं ठाड़े वस्त्र पतंगी रंग के धराये जाते हैं. 

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. मिलवा – मोती, माणक, पन्ना तथा जड़ाव स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर पतंगी रंग की, श्वेत-श्याम टिपकियों वाली छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच के स्थान पर पन्ना का पट्टीदार कटिपेच, मोरपंख की सादी चन्द्रिका पर रंगीन तिकड़ी एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में माणक के लोलकबंदी – लड़वाले चार कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकंठ में सोने का डोरा, हमेल, चन्द्रहार अक्काजी का आदि धराये जाते हैं. लाल, पीले एवं श्वेत रंग के पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. श्रीहस्त में सोने के बंटदार वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
आरसी दोनों समय बड़ी डांडी की, पट चीड का, गोटी चांदी की और वस्त्र के छोगा आते हैं. आज छड़ी नहीं धरायी जाती है.

Sunday, 4 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण दशमी

व्रज – माघ कृष्ण दशमी 
Monday, 05 February 2024

हरे साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग्वालपगा पर पगा चंद्रिका (मोरशिखा) के शृंगार

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को हरे साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर ग्वालपगा और पगा चंद्रिका (मोरशिखा) का श्रृंगार धराया जायेगा. 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग :आसावरी)

चल री सखी नंदगाव जई बसिये,खिरक खेलत व्रजचंद सो हसिये ।।१।।
बसत बठेन सब सुखमाई,कठिन ईहै दुःख दूरि कन्हाई ।।२।।
माखन चोरत दूरि दूरि देख्यों,सजनी जनम सूफल करि लेखों ।।३।।
जलचर लोचन छिन छिन प्यासा, कठिन प्रीति परमानंददासा ।।४।।

साज – श्रीजी में आज सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली (शीतकाल की) एवं हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज हरे रंग के साटन पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं. पटका हरे रंग का मलमल का धराया जाता हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान के (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर हरे ग्वालपगा के ऊपर सिरपैंच तथा पगा चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में लोलकबिंदी धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी एवं कमल माला धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी (एक सोना का) एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी चाँदी की बाघ बकरी के आते है.

Saturday, 3 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण नवमी

व्रज – माघ कृष्ण नवमी 
Sunday, 04 February 2024

अमरसी साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर बाँकी चंद्रिका के शृंगार

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को अमरसी साटन का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर बाँकी चंद्रिका का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आशावरी/तोड़ी) 
माईरी लालन आये आयेरी मया कर तन मन धन सब वारो।
 हों बलिगई सखी आजकी आवनी पर पलकसों मग झारो।।१।।
 अति सुकुमार कोमल पद कारण सखीरी कंकर गुन सब तारो।
नन्ददास प्रभु नंदनंदन सों ऐसी प्रीति नित धारो।।२।।

साज – श्रीजी में आज केसरी रंग की सुरमा सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम वाली एवं हांशिया वाली शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज अमरसी रंग की साटन (Satin) का सूथन, चोली, घेरदार वागा तथा मोजाजी धराये जाते हैं. घेरदार वागा, रूपहरी किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग  के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज छोटा (कमर तक) चार माल का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर अमरसी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, बाँकी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में हरे मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धरायी जाती हैं.   
पट अमरसी एवं गोटी चाँदी की आती है.

Friday, 2 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण अष्टमी

व्रज – माघ कृष्ण अष्टमी
Saturday, 03 February 2024

नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े दामोदरजी (दाऊजी) महाराज का उत्सव 

विशेष – श्री गोवर्धनधरण प्रभु जिनके यहाँ व्रज से मेवाड़ पधारे, आज श्रीजी में उन नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री बड़े दामोदरजी (दाऊजी) का उत्सव है. 
आपका प्राकट्य श्री लाल-गिरधरजी महाराज के यहाँ विक्रम संवत १७११ में गोकुल में हुआ. 
आप अद्भुत स्वरुपवान थे एवं सदैव अदरक एवं गुड़ अपने साथ रखते थे एवं अरोगते थे. 
इसी भाव से आज श्रीजी को विशिष्ट सामग्रियां भी अरोगायी जाती है जिसका विवरण मैं नीचे सेवाक्रम में दे रहा हूँ.

श्रीजी को नियम से लाल रंग की खीनखाब के बड़े बूटा वाले चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर जड़ाव माणक की कुल्हे के ऊपर स्वर्ण जड़ाव का घेरा धराया जाता है. 

प्रभु को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से केशरयुक्त जलेबी के टूक व दूधघर में सिद्ध की गयी केसर युक्त बासोंदी की हांडी अरोगायी जाती है. 
इसके अतिरिक्त आज गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में ही केशरयुक्त संजाब (गेहूं के रवा) की खीर व श्रीखंड-वड़ा भी अरोगाये जाते हैं. 
राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता एवं सखड़ी में आदा प्रकार अर्थात अदरक की विविध सामग्रियां जैसे अदरक का शाक व अदरक के गुंजा व अदरक भात अरोगाये जाते हैं.
श्रीजी को अदरक के गुंजा आज के अतिरिक्त केवल मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा (घर के छप्पनभोग) के दिन ही अरोगाये जाते हैं.

उत्सव भोग के रूप में आज श्रीजी को संध्या-आरती में विशेष रूप से आदा (अदरक के रस से युक्त) की केसरी मनोर के लड्डू एवं आज अरोगाये जाने वाले ठोड़ के स्थान पर गुड़ की बूंदी के बड़े लड्डू अरोगाये जाते हैं. ये दोनों सामग्रियां श्रीजी को वर्षभर में केवल आज के अतिरिक्त केवल मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा (घर के छप्पनभोग) के दिन ही अरोगायी जाती है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

सेवक की सुख रास सदा श्रीवल्लभ राजकुमार l
दरसन ही प्रसन्न होत मन पुरुषोत्तम अवतार ll 1 ll
सुदृष्टि चित्ते सिद्धांत बतायो लीला जग विस्तार l
यह तजि अन्य ज्ञानको ध्यावत, भूल्यो कुमति विचार ll 2 ll
‘छीतस्वामी’ उद्धरे पतित श्रीविट्ठल कृपा उदार l
इनके कहे गही भुज दृढ करि गिरधर नन्द दुलार ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में कत्थई रंग की मखमल के ऊपर सुनहरी रेशम से भरे छोटे-छोटे कूंडों (पात्रों) व हंसों की सज्जा से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. कत्थई एवं श्याम रंग के हांशिया के ऊपर भी सुन्दर सज्जा की हुई है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है एवं प्रभु के स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को लाल रंग की, बड़े बूटा के खीनखाब का सूथन, चोली, चाकदार वागा एवं मलमल का पटका धराये जाते हैं. टंकमा हीरा के मोजाजी एवं मेघश्याम रंग के ठाड़े वस्त्र धराये जाते हैं. 

श्रृंगार – आज प्रभु को वनमाला का (चरणारविन्द तक) उत्सव का भारी श्रृंगार धराये जाते हैं. मिलवा – प्रधानतया हीरा, मोती, माणक, पन्ना एवं जड़ाव स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर जड़ाव हीरा की कुल्हे के ऊपर सिरपैंच, स्वर्ण का जड़ाव का घेरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में हीरा के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. स्वरुप की बायीं ओर उत्सव की हीरा की चोटी धरायी जाती है. 
श्रीकंठ में नीचे पदक, ऊपर हार, माला आदि धराये जाते हैं. कली, कस्तूरी आदि सभी माला धरायी जाती हैं.
गुलाबी गुलाब की एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. श्रीहस्त में स्वर्ण के वेणुजी एवं दो वेत्रजी (हीरा व पन्ना के) धराये जाते हैं.
आरसी श्रुंगार में चार झाड़ की एवं राजभोग में सोने की डांडी की, पट प्रतिनिधि का व गोटी सोने की बड़ी जाली की आती है.

Thursday, 1 February 2024

व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी

व्रज – माघ कृष्ण सप्तमी 
Friday, 02 February 2024

पीरेही कुंडल नूपुर पीरे पीरो पीतांबरो ओढे ठाडो ।
पीरीही पाग लटक सिर सोहे पीरो छोर रह्यो कटि गाढो ।।१।।
पीरी बनी कटि काछनी लालके पीरो छोर रच्यो पटुकाको ।
गोविन्द प्रभुकी लीला दरसत पीरोही लकुट लिये कर ठाडो ।।२।।

दशम (पीली/बसंती) घटा

विशेष – आज श्रीजी में शीतकाल की दशम (पीली) घटा है. विगत कल ही श्रीजी ने बसंत के आगम का श्रृंगार धराया है और बसंत ऋतु का आभास हो और हम तत्परता से बसंत का स्वागत करें इस भाव से आज श्रीजी में पीली घटा के दर्शन होंगे. 

श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋतु में विविध रंगों के बादलों के गहराने से जिस प्रकार घटा बनती है उसी भाव से श्रीजी में मार्गशीर्ष व पौष मास में विविध रंगों की द्वादश घटाएँ द्वादश कुंज के भाव से होती हैं. 

कई वर्षों पहले चारों यूथाधिपतिओं के भाव से चार घटाएँ होती थी परन्तु गौस्वामी वंश परंपरा के सभी तिलकायतों ने अपने-अपने समय में प्रभु के सुख एवं वैभव वृद्धि हेतु विभिन्न मनोरथ किये.
इसी परंपरा को कायम रखते हुए नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराज ने अपने पुत्र श्री दामोदरलालजी की विनती और आग्रह पर निकुंजनायक प्रभु के सुख और आनंद हेतु सभी द्वादश कुंजों के भाव से आठ घटाएँ बढ़ाकर कुल बारह (द्वादश) घटाएँ (दूज का चंदा सहित) कर दी जो कि आज भी चल रही हैं.

इनमें कुछ घटाएँ (हरी, श्याम, लाल, अमरसी, रुपहली व बैंगनी) नियत दिनों पर एवं अन्य कुछ (गुलाबी, पतंगी, फ़िरोज़ी, पीली और सुनहरी घटा) ऐच्छिक है जो बसंत-पंचमी से पूर्व खाली दिनों में ली जाती हैं. 

ये द्वादश कुंज इस प्रकार है –

अरुण कुंज, हरित कुंज, हेम कुंज, पूर्णेन्दु कुंज, श्याम कुंज, कदम्ब कुंज, सिताम्बु कुंज, वसंत कुंज, माधवी कुंज, कमल कुंज, चंपा कुंज और नीलकमल कुंज.
जिस रंग की घटा हो उसी रंग के कुंज की भावना होती है. इसी श्रृंखला में आज वसंत कुंज की भावना से श्रीजी में पीली घटा होगी. साज, वस्त्र आदि सभी पीले रंग के होते हैं. सर्व आभरण स्वर्ण के धराये जाते हैं. 

शीतकाल में द्वादश घटाएँ होती हैं जिनमें केवल आज की पीली घटा में ही पीला मलमल का कटि-पटका भी धराया जाता है. 
अन्य किसी घटा में कटि-पटका नहीं धराया जाता.
आज पूरे दिन पिले फूलो की मालाजी आती हैं.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : जेतश्री/धनाश्री) 

देखत व्रजनाथ वदन मदन कोटि वारो l
जलज निकट नयन मीन उपमा बिचारो ll 1 ll
कुंडल ससि सूर उदित अघटनकी घटना l
कुंतल अलिमाल तामें मुरली कल रटना ll 2 ll
जलद खंड सुंदर तन पीत बसन दामिनी l
वनमाला सक्र चाप मोही सब भामिनी ll 3 ll
मुक्तामनि हार-मंडित तारागन पांति l
‘परमानंद स्वामी’ गोपाल सब विचित्र भांति ll 4 ll

साज – श्रीजी में आज पीले रंग के दरियाई वस्त्र की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर पीली बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पीले रंग के दरियाई वस्त्र का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. पीले मलमल का कटि-पटका भी धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र भी पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) चार माला का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण स्वर्ण के धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर पीले रंग की गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच, पीले रेशम के दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. अलख धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में सोना के दो कर्णफूल धराये जाते हैं. पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में स्वर्ण के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. आरसी सोने की, पट पीला व गोटी छोटी सोने की आती है.

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या Wednesday, 12 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या  Wednesday, 12 August 2026 हरियाली अमावस्या  आज के हिंडोलना के दर्शन  आज चौक में हरे पत्तों की बिछावट ...