By Vaishnav, For Vaishnav

Monday, 2 January 2023

व्रज – पौष शुक्ल द्वादशी

व्रज – पौष शुक्ल द्वादशी
Tuesday, 03 January 2023

भोग श्रृंगार यशोदा मैया श्री बिटठ्लनाथ के हाथ को भावे ।
नीके न्हवाय श्रृंगार करतहे आछी रूचिसो मोहि पाग बॅधावे ।।१।।
ताते सदाहो उहाहि रहत हो तू डर माखन दुध छिपावे ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री बिटठ्ल निरख नयना त्रैताप नसावे ।।२।।

आज रजाई गद्दल श्याम खीनखाब के आते हैं.

शीतकाल की चतुर्थ चौकी के वस्त्र श्रृंगार निश्चित हैं. आज प्रभु को श्याम खीनखाब के चाकदार वस्त्र एवं श्रीमस्तक पर जड़ाव के ग्वाल-पगा के ऊपर सादी मोर चंद्रिका का विशिष्ट श्रृंगार धराया जाता है. 

सामान्यतया श्रीमस्तक पर मोरपंख की सादी चंद्रिका धरें तब कर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं और छोटा (कमर तक) अथवा मध्य का (घुटनों तक) श्रृंगार धराया जाता है. 
आज के श्रृंगार की विशिष्टता यह है कि वर्ष में केवल आज मोर-चंद्रिका के साथ मयुराकृति कुंडल धराये जाते हैं और वनमाला का (चरणारविन्द तक) श्रृंगार धराया जाता है.

आज श्रीजी को विशेष रूप से गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में तवापूड़ी अरोगायी जाती है.

श्रीजी में पांचवी और अंतिम चौकी आगामी बसंत पंचमी के एक दिन पूर्व अर्थात माघ शुक्ल चतुर्थी को गुड़कल की अरोगायी जाएगी.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : आसावरी)

गोवर्धन की शिखर सांवरो बोलत धौरी धेनु l
पीत बसन सिर मोर के चंदोवा धरि मोहन मुख बेनु ll 1 ll
बनजु जात नवचित्र किये अंग ग्वालबाल संग सेनु l
‘कृष्णदास’ बलि बलि यह लीला पीवत धैया मथमथ फेनु ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में श्याम रंग की खीनखाब की बड़े बूटा की पिछवाई धरायी जाती है जो कि लाल रंग की खीनखाब की किनारी के हांशिया से सुसज्जित है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है एवं प्रभु के स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्याम रंग की खीनखाब का सूथन, चोली, चाकदार वागा लाल रंग का पटका एवं टकमां हीरा के मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – श्रीजी को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरा, मोती तथा जड़ाव सोने के आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर हीरा एवं माणक का जड़ाऊ ग्वाल पगा के ऊपर सिरपैंच, मोरपंख की सादी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
त्रवल नहीं धराया जाता हैं.हीरा की बघ्घी धरायी जाती हैं.
एक कली की माला धरायी जाती हैं.
 सफेद एवं पीले पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में विट्ठलेशजी  के वेणुजी एवं वेत्रजी (एक सोना का) धराये जाते हैं.
पट काशी का व गोटी कूदती हुई बाघ-बकरी की आती है.
आरसी शृंगार में पीले खंड की एवं राजभोग में सोने की दिखाई जाती हैं.

Sunday, 1 January 2023

व्रज – पौष शुक्ल एकादशी

व्रज – पौष शुक्ल एकादशी
Monday, 02 January 2022

रसिकनी रसमे रहत गढी ।
कनकवेली व्रुषभानुं नंदिनी श्याम तमाल चढी ।।१।।
बिहरत श्री गिरिधरनलाल संग कोने पाठ पढी ।
कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर रति-रस केलि बढी ।।२।।

पुत्रदा एकादशी, श्रीजी में रस मंडान
त्रिकुटी के बागा को श्रृंगार 

विशेष - आज पुत्रदा एकादशी है. आज श्रीजी में शाकघर का रस-मंडान होता है. रस-मंडान के दिन श्रीजी को संध्या-आरती में शाकघर में सिद्ध 108 स्वर्ण व रजत के पात्रों में गन्ने का रस अरोगाया जाता है. 
इस रस की विशेषता है कि इस रस में विशेष रूप से कस्तूरी भी मिलायी जाती है. 
आज प्रभु को संध्या-आरती दर्शन में चून (गेहूं के आटे) का सीरा का डबरा भी अरोगाया जाता है जिसमें गन्ने का रस मिश्रित होता है.

प्रभु के समक्ष उपरोक्त ‘रसिकनी रसमें रहत गढ़ी’ सुन्दर कीर्तन गाया जाता है.

राजभोग दर्शन –

साज – आज श्रीजी में शीतकाल की  सुन्दर कलात्मक पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को कत्थई रंग के साटन के तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार (त्रिकुटी के) वागा धराये जाते हैं. गुलाबी तथा सुनहरी ज़री का गाती का त्रिखुना पटका धराया जाता है. रुपहली ज़री के मोजाजी एवं ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर पन्ना का त्रिखुना टीपारा का साज़ एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.श्रीकर्ण में मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं.
आज चोटीजी नहीं आती हैं.
श्रीकंठ में कस्तूरी, कली एवं कमल माला माला धरायी जाती है. गुलाब के पुष्पों की एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. 
 श्रीहस्त में लहरियाँ के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट कत्थई एवं गोटी बाघ बकरी की आती हैं.

संध्या-आरती दर्शन उपरांत प्रभु के श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े कर हल्के आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक टिपारा का साज बड़ा कर के छज्जेदार पाग धरा कर  रुपहली लूम तुर्रा धराये जाते हैं.

Saturday, 31 December 2022

व्रज – पौष शुक्ल दशमी

व्रज – पौष शुक्ल दशमी
Sunday, 01 January 2023

श्वेत साटन के घेरदार वागा पर स्याम रंग की ख़िनख़ाब की फतवी एवं श्रीमस्तक पर स्वर्ण की  गोल पाग और गोल चंद्रिका के शृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं. 
ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा एवं प्रभु के तत्सुख की भावना से मुखियाजी के स्व-विवेक के आधार पर धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को श्वेत साटन का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा पर स्याम रंग की ख़िनख़ाब की फतवी (आधुनिक जैकेट जैसी पौशाक) का श्रृंगार धराया जायेगा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : आशावरी)

व्रज के खरिक वन आछे बड्डे बगर l
नवतरुनि नवरुलित मंडित अगनित सुरभी हूँक डगर ll 1 ll
जहा तहां दधिमंथन घरमके प्रमुदित माखनचोर लंगर l
मागधसुत वदत बंदीजन जस राजत सुरपुर नगरी नगर ll 2 ll
दिन मंगल दीनि बंदनमाला भवन सुवासित धूप अगर l
कौन गिने ‘हरिदास’ कुंवर गुन मसि सागर अरु अवनी कगर ll 3 ll

साज – आज श्रीजी में श्वेत रंग की सुनहरी ज़री की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को श्वेत साटन का सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, घेरदार वागा, चोली एवं स्याम ख़िनख़ाब की फतवी (Jacket) धरायी जाती है. सुनहरी एवं रंग के मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र लाल रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. स्वर्ण के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर स्वर्ण की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
आज फ़तवी धराए जाने से त्रवल, कटिपेच बाजु एवं पोची नहीं धरायी जाती हैं. आज प्रभु को श्रीकंठ में हीरा की कंठी धराई जाती हैं.
 श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
 श्रीहस्तं में स्वर्ण के एक वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट श्वेत एवं गोटी सोना की आती हैं.

Friday, 30 December 2022

व्रज – पौष शुक्ल नवमी

व्रज – पौष शुक्ल नवमी
Saturday, 31 December 2022

फूल गुलाबी साज अति शोभित तापर राजत बालकृष्ण बिहारी ।
फ़ेंटा गुलाबी पिछोरा रह्यो फबि फूल गुलाबी रंग अति भारी ।।१।।
वाम भाग वृषभाननंदनी पहेरे गुलाबी कंचुकी सारी ।
फूल गुलाबी हस्तकमलमें छबि पर कुंभनदास बलिहारी ।।२।।

अष्टम (गुलाबी) घटा

आज श्रीजी में गुलाबी घटा के दर्शन होंगे.

यह घटा निश्चित है पर इसका दिन व क्रम ऐच्छिक है और इस वर्ष आठवें क्रम पर ली गयी है.

श्रीजी में शीतकाल में विविध रंगों की घटाओं के दर्शन होते हैं. घटा के दिन सर्व वस्त्र, साज आदि एक ही रंग के होते हैं. आकाश में वर्षाऋतु में विविध रंगों के बादलों के गहराने से जिस प्रकार घटा बनती है उसी भाव से श्रीजी में मार्गशीर्ष व पौष मास में विविध रंगों की द्वादश घटाएँ द्वादश कुंज के भाव से होती हैं. 

कई वर्षों पहले चारों यूथाधिपतिओं के भाव से चार घटाएँ होती थी परन्तु गौस्वामी वंश परंपरा के सभी तिलकायतों ने अपने-अपने समय में प्रभु के सुख एवं वैभव वृद्धि हेतु विभिन्न मनोरथ किये. इसी परंपरा को कायम रखते हुए नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री गोवर्धनलालजी महाराज ने निकुंजनायक प्रभु के सुख और आनंद हेतु सभी द्वादश कुंजों के भाव से आठ घटाएँ बढ़ाकर कुल बारह (द्वादश) घटाएँ (दूज का चंदा सहित) कर दी जो कि आज भी चल रही हैं. 

इनमें कुछ घटाएँ (हरी, श्याम, लाल, अमरसी, रुपहली व बैंगनी) नियत दिनों पर एवं अन्य कुछ (गुलाबी, पतंगी, फ़िरोज़ी, पीली और सुनहरी घटा) ऐच्छिक है जो बसंत-पंचमी से पूर्व खाली दिनों में ली जाती हैं. 

ये द्वादश कुंज इस प्रकार है –
अरुण कुंज, हरित कुंज, हेम कुंज, पूर्णेन्दु कुंज, श्याम कुंज, कदम्ब कुंज, सिताम्बु कुंज, वसंत कुंज, माधवी कुंज, कमल कुंज, चंपा कुंज और नीलकमल कुंज.
जिस रंग की घटा हो उसी रंग के कुंज की भावना होती है. इसी श्रृंखला में आज कमल कुंज की भावना से श्रीजी में गुलाबी घटा होगी. साज, वस्त्र आदि सभी गुलाबी रंग के होते हैं. सर्व आभरण गुलाबी मीना एवं स्वर्ण के धराये जाते हैं. 

सभी घटाओं में राजभोग तक का सेवाक्रम अन्य दिनों की तुलना में काफ़ी जल्दी हो जाता है. 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन 

आज शृंगार निरख श्यामा को नीको बन्यो श्याम मन भावत ।
यह छबि तनहि लखायो चाहत कर गहि के मुखचंद्र दिखावत ।।१।।
मुख जोरें प्रतिबिम्ब विराजत निरख निरख मन में मुस्कावत ।
चतुर्भुज प्रभु गिरिधर श्री राधा अरस परस दोऊ रीझि रिझावत ।।२।।

साज – श्रीजी में आज गुलाबी दरियाई वस्त्र की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर गुलाबी बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी दरियाई वस्त्र का सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र भी गुलाबी धराये जाते हैं. 

श्रृंगार – प्रभु को आज छोटा (कमर तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. गुलाबी मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर गुलाबी गोल-पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, गुलाबी रेशम के दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में गुलाबी मीना का  कर्णफूल धराये जाते हैं.
आज दो दुलड़ा धराये जाते हैं.
 श्रीकंठ में चार माला धरायी जाती है. श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में गुलाबी मीना के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट गुलाबी व गोटी चाँदी की आती है.

संध्या-आरती उपरान्त प्रभु के श्रीकंठ व श्रीमस्तक के आभरण बड़े कर शयन समय छेड़ान के श्रृंगार धराये जाते हैं श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रुपहरी धराये जाते हैं. इन दिनों शयन दर्शन बाहर नहीं खोले जाते. 

Thursday, 29 December 2022

व्रज – पौष शुक्ल अष्टमी

व्रज – पौष शुक्ल अष्टमी
Friday, 30 December 2022

मेघस्याम साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर फेटा का साज के शृंगार

जिन तिथियों के लिए प्रभु की सेवा प्रणालिका में कोई वस्त्र, श्रृंगार निर्धारित नहीं होते उन तिथियों में प्रभु को ऐच्छिक वस्त्र व श्रृंगार धराये जाते हैं. 
ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार प्रभु श्री गोवर्धनधरण की इच्छा, ऋतु की अनुकूलता, ऐच्छिक श्रृंगारों की उपलब्धता, पूज्य श्री तिलकायत महाराजश्री की आज्ञा एवं प्रभु के तत्सुख की भावना से मुखियाजी के स्व-विवेक के आधार पर धराये जाते हैं.

ऐच्छिक वस्त्र, श्रृंगार के रूप में आज श्रीजी को मेघस्याम साटन के चागदार वागा एवं श्रीमस्तक पर फेटा का साज का श्रृंगार धराया जायेगा.

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : तोड़ी)

सोने की मटुकिया, जराव की इंडुरिया, श्याम प्रेम भरी भूल गयी गोरस।। 
प्रीतम को नाम ले ले, कहेत लेओरी कोऊ, ब्रजमें डोलत बोलत है चहुँओ रस || १|| 
चलो श्याम सुन्दर एकांत दधि खाइए, न जात तजे वाको रस।। 
“तानसेन" के प्रभु हौंजू कहतहों, साँझ भई रटत निकसी हुती भोरस।। २ ।।

साज – आज श्रीजी में मेघश्याम रंग की शीतकाल की पिछवाई धरायी जाती है गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है एवं प्रभु के स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज मेघश्याम साटन पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं. पटका मलमल का धराया जाता हैं.ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया है. हरे मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर फेंटा का साज धराया जाता है. मेघश्याम रंग के फेंटा के ऊपर सिरपैंच, मेघस्याम रंग की रेशम की बीच की चंद्रिका, दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती की लोलकबंदी-लड़वाले कर्णफूल धराये जाते हैं. 
कमल माला धरावे.
गुलाबी गुलाब के पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, लाल मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट मेघस्याम एवं गोटी चाँदी की बाघ बकरी की धरायी जाती हैं.

Wednesday, 28 December 2022

व्रज – पौष शुक्ल सप्तमी

व्रज – पौष शुक्ल सप्तमी
Thursday, 29 December 2022

विशेष-आज श्रीजी में अम्बानी परिवार द्वारा चंवरी का भव्य मनोरथ होगा.
इस मनोरथ में लगभग बड़ा मनोरथ (छप्पनभोग) जितनी सामग्रियाँ अरोगायी जाएगी.
मणिकोठा, डोल-तिबारी, रतनचौक आदि में मनोरथ के भोग साजे जाएंगे अतः श्रीजी में मंगला के पश्चात सीधे राजभोग के दर्शन ही खुलेंगे.

जुगल वर आवत है गठजोरें ।
संग शोभित वृषभान नंदिनी ललितादिक तृण तोरे ।।१।।
शीश सेहरो बन्यो लालकें, निरख हरख चितचोरे ।
निरख निरख बलजाय गदाधर छबि न बढी कछु थोरे ।।२।।

शीतकाल के सेहरा का द्वितीय शृंगार

शीतकाल में श्रीजी को चार बार सेहरा धराया जाता है. इनको धराये जाने का दिन निश्चित नहीं है परन्तु शीतकाल में जब भी सेहरा धराया जाता है तो प्रभु को मीठी द्वादशी आरोगाई जाती हैं. आज प्रभु को खांड़ के रस की मीठी लापसी (द्वादशी) आरोगाई जाती हैं.

आज श्रीजी को लाल रंग के साटन पर सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली चाकदार वागा का श्रृंगार धराया जायेगा. 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

मोरको सिर मुकुट बन्यो मोर ही की माला l
दुलहनसि राधाजु दुल्हे हो नंदलाला ll 1 ll
बचन रचन चार हसि गावत व्रजबाला l
घोंघी के प्रभु राजत हें मंडप गोपाला ll 2 ll

साज – श्रीजी में आज लाल रंग के आधारवस्त्र (Base Fabric) पर विवाह के मंडप की ज़री के ज़रदोज़ी के काम (Work) से सुसज्जित सुन्दर पिछवाई धरायी जाती है जिसके हाशिया में फूलपत्ती का क़सीदे का काम एवं जिसके एक तरफ़ श्रीस्वामिनीजी विवाह के सेहरा के शृंगार में एवं दूसरी तरफ़ श्रीयमुनाजी विराजमान हैं और गोपियाँ विवाह के मंगल गीत का गान साज सहित  कर रही हैं. गादी, तकिया पर लाल रंग की एवं चरणचौकी पर सफ़ेद रंग की बिछावट की जाती है.

वस्त्र – श्रीजी को आज लाल रंग का साटन का सूथन, चोली एवं चाकदार वागा धराये जाते हैं एवं पतंगी मलमल का रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित अंतरवास का राजशाही पटका धराया जाता है. ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के धराये जाते हैं. लाल ज़री के मोजाजी भी धराये जाते हैं. 

श्रृंगार – प्रभु को आज वनमाला का (चरणारविन्द तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर लाल रंग के दुमाला के ऊपर हीरा व माणक का सेहरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में हीरा के मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. सेहरा पर मीना की चोटी दायीं ओर धरायी जाती है. 
श्रीकंठ में कस्तूरी, कली एवं कमल माला माला धरायी जाती है. 
लाल एवं पीले पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरिया के वेणुजी एवं वेत्रजी (एक मीना के) धराये जाते हैं. 
पट लाल एवं गोटी राग रंग की आती हैं.

संध्या-आरती दर्शन उपरांत प्रभु के शृंगार सेहरा एवं श्रीकंठ के आभरण बड़े कर दिए जाते हैं.अनोसर में दुमाला बड़ा करके छज्जेदार पाग धरायी जाती हैं.

Tuesday, 27 December 2022

व्रज – पौष शुक्ल षष्ठी

व्रज – पौष शुक्ल षष्ठी
Wednesday, 28 December 2022

नित्यलीलास्थ गौस्वामी तिलकायत श्री दामोदरलालजी महाराज का उत्सव

श्रीजी को नियम के पीले रंग के साटन के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर हीरे की टिपारा की टोपी के ऊपर टिपारा का साज धराया जाता है.

श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में विशेष रूप से मनमनोहर (केशर बूंदी) के लड्डू, दूधघर में सिद्ध की गयी केसरयुक्त बासोंदी की हांडी और चार विविध प्रकार के फलों के मीठा अरोगाये जाते हैं.

राजभोग में अनसखड़ी में दाख (किशमिश) का रायता एवं सखड़ी में मीठी सेव, केसरयुक्त पेठा व छह-भात (मेवा-भात, दही-भात, राई-भात, श्रीखंड-भात, वड़ी-भात व नारंगी भात) अरोगाये जाते हैं. 

राजभोग दर्शन में प्रभु सम्मुख छह बीड़ा सिकोरी (सोने का जालीदार पात्र) में रखे जाते हैं. मुखियाजी प्रभु को एक कलदार रुपया न्यौछावर कर कीर्तनिया को देते हैं. 

आज श्री नवनीतप्रियाजी में पलना के मनोरथी स्वयं श्रीजी के तिलकायत होते हैं. सामान्य दिनों में श्री नवनीतप्रियाजी को पलना की सामग्री के रूप में बूंदी के लड्डू अरोगाये जाते हैं परन्तु आज श्री लाड़लेलाल प्रभु को पलना में तवापूड़ी अरोगायी जाती 

राजभोग दर्शन – 

साज – आज श्रीजी में केसरी रंग की साटन (Satin) की पिछवाई धरायी जाती है जिसके सलमा-सितारा के चित्रांकन में पलने में झूलते श्री गोवर्धननाथजी को एक ओर नन्दराय-यशोदा जी खिलौनों से खिला रहें हैं एवं दायीं ओर श्री गोवर्धनलालजी महाराज एवं श्री दामोदरलालजी प्रभु को पलना झुला रहे हैं. पलने के ऊपर मोती का तोरण शोभित है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है एवं स्वरुप के सम्मुख लाल रंग की तेह बिछाई जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पीला रंग की साटन का, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित सूथन, चोली, घेरदार वागा एवं मोजाजी धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र पतंगी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटनों तक) भारी श्रृंगार धराया जाता है. हीरा के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर हीरे के जड़ाव की टोपी के ऊपर तीन तुर्री, बाबरी, अलख (घुंघराले केश की लटें) मध्य में हीरे के जड़ाव की मोरशिखा, दोनों ओर दोहरा कतरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. हीरा की चोटी धरायी जाती है. 
श्रीकर्ण में जड़ाव मयूराकृति कुंडल धराये जाते हैं. पीठिका के ऊपर हीरे के जड़ाव का चौखटा धराया जाता है. हास, त्रवल सब धराये जाते हैं. एक माला कली की व एक कमल माला धरायी जाती है. 

गुलाबी एवं पीले रंग की सुन्दर थागवाली दो मालाजी धरायी जाती हैं. श्रीहस्त में हीरा के वेणुजी एवं हीरा-जड़ित दो वेत्रजी धराये जाते हैं.

पट पीला, गोटी श्याम मीना की व आरसी लाल मखमल की आती 

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या Wednesday, 12 August 2026

व्रज - विस २०८३ श्रावण कृष्ण अमावस्या  Wednesday, 12 August 2026 हरियाली अमावस्या  आज के हिंडोलना के दर्शन  आज चौक में हरे पत्तों की बिछावट ...