By Vaishnav, For Vaishnav

Saturday, 28 November 2020

श्रीगुसांईजी की सेवक पाथो गूजरी की वार्ता

श्रीगुसांईजी की सेवक पाथो गूजरी की वार्ता   

पाथो गूजरी आन्योर में रहती थी, एक दिन बेटा के लिए भोजन (छाक) ले जा रही थी, रास्ते में श्रीनाथजी ने उससे कहा -" ये दही - भात हम को दो । " उसने उसमें से दही - भात श्रीनाथजी को दिया, उन्होंने इसे आरोगा और इतने में ही शंखनाद हो गया । श्रीनाथजी बिना हाथ धोये ही मन्दिर में पधारे ।

श्री गुसांईजी ने उनके श्रीहस्त देखकर पूछा - "आज कहाँ आरोगे हैं ?"
श्री नाथजी ने कहा- "पाथो गूजरी से दही - भात लिया था ।" 

उसी दिन श्रीगुसांईजी ने पोरिया से कहा - "पाथो गूजरी जब भी यहाँ आए, किवाड़ खोल दिया करो ।" जब श्रीनाथजी की आज्ञा होती, उसी दिन पाथो गूजरी आकर दही - भात आरोगा कर चली जाती थी ।

उसी दिन से श्रीगुसांईजी ने कुनवारा में मुख्य सामग्री दही भात की निर्धारित की । 
पाथो गूजरी ऐसी कृपा पात्र थी ।।

No comments:

Post a Comment

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदाThursday, 13 August 2026

विस २०८३ श्रावण शुक्ल प्रतिपदा Thursday, 13 August 2026 हरे एवं सफ़ेद रंग के लहरिया का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर जमाव के क़तरा...