व्रज - ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी
Tuesday, 22 June 2021
यमुना जल घट भर चलि चंद्रावली नारि ।
मारग में खेलत मिले घनश्याम मुरारि ।।१।।
नयनन सों नयना मिले मन हर लियो लुभाय ।
मोहन मूरति मन बसी पग धर्यो न जाय ।।२।।
स्नान को जल भरवे को श्रृंगार
श्री विशाल बावा स्नान यात्रा के उत्सव के लिये कल शाम को नाथद्वारा पधार गये हैं.
(चतुर्दशी क्षय होने से एवं त्रयोदशी को नित्यलीलास्थ तिलकायत श्री गिरिधारीजी महाराज श्री का उत्सव होने से स्नान का जल भरने का शृंगार आज लिया जायेगा लेकिन स्नान का जल कल त्रयोदशी को भरा जायेगा.
विशेष – आज प्रभु को नियम का गुलाबी आड़बंद व श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग धरायी जाती है. ज्येष्ठाभिषेक के लिए जल भरकर आती गोपियों की पिछवाई धरायी जाती हैं.
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
दुपहरी झनक भई तामें आये पिय मेरे मैं ऊठ कीनो आदर l
आँखे भर ले गई तनकी तपत सब ठौर ठौर बूंदन चमक ll 1 ll
रोम रोम सुख संतोष भयो गयो अनंग तनमें न रह्यो ननक l
मोहें मिल्यो अब ‘धोंधी’ के प्रभु मिट गई विरहकी जनक ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में श्वेत जाली (Net) पर जल भरकर लाती गोपियों के सुन्दर काम (Work) से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की गयी है.
वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी रंग की मलमल का, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित आड़बंद धराया जाता है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, श्वेत पंख के कतरा (खंडेला) एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ ऐसी ही दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सोने-चांदी (गंगा-जमुना) के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
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