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Tuesday, 23 April 2024

व्रज - वैशाख कृष्ण प्रतिपदा

व्रज - वैशाख कृष्ण प्रतिपदा
Wednesday, 24 April 2024

हरे लहरियाँ के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर क़तरा के शृंगार

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : नट)

नातर लीला होती जूनी।
जो पै श्रीवल्लभ प्रकट न होते वसुधा रहती सूनी।।१।।
दिनप्रति नईनई छबि लागत ज्यों कंचन बिच चूनी।
सगुनदास यह घरको सेवक जस गावत जाको मुनी।।२।।

साज – श्रीजी में आज हरे सफ़ेद लहरियाँ की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को हरे सफ़ेद लहरियाँ का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र गुलाबी रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) गुलाबी मीना के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर हरे सफ़ेद लहरियाँ की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. 

चैत्री गुलाब के पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं. 
श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट हरा व गोटी चाँदी की आती है.

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