By Vaishnav, For Vaishnav

Friday, 5 April 2024

व्रज - चैत्र कृष्ण द्वादशी

व्रज - चैत्र कृष्ण द्वादशी 
Saturday, 06 April 2024

सुनहरी ज़री के घेरदार वागा, श्रीमस्तक पर छज्जेदार चीरा (पाग) पर क़तरा के शृंगार

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll
मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान
जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन
अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll
वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल
कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में सुनहरी ज़री की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को सुनहरी ज़री का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. स्याम रंग के ठाडे वस्त्र धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर सुनहरी रंग के छज्जेदार चीरा (पाग) के ऊपर सिरपैंच, क़तरा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
 गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, स्याम मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट सुनहरी एवं गोटी मीना की आती है. 

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं. शयन दर्शन में श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराया जाता है.

No comments:

Post a Comment

व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया

व्रज - चैत्र शुक्ल तृतीया  Saturday, 21 March 2026 छबीली राधे,पूज लेनी गणगौर ।  ललिता विशाखा,सब मिल निकसी, आइ वृषभान की पोर, सधन कुंज गहवर व...