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Wednesday, 24 September 2025

व्रज - आश्विन शुक्ल तृतीया(द्वितीय)

व्रज - आश्विन शुक्ल तृतीया(द्वितीय)
Thursday, 25 September 2025

अमरसी छापा का सुथन स्वेत छापा के खुले बन्ध एवं श्रीमस्तक पर अमरसी छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के शृंगार

तिथि वृद्धि के कारण आज तृतीया (द्वितीय) है.

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

बैठे हरि राधा संग कुंजभवन अपने रंग
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई l
मोहन अति ही सुजान परम चतुर गुन निधान
जान बुझ एक तान चूकके बजाई ll 1 ll
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुन प्रवीन 
अति नवीन रूप सहित, वही तान सूनाई ll 2 ll
‘वल्लभ’ गिरिधरन लाल रिझ दई अंकमाल
कहत भले भले जु लाल सुंदर सुखदाई ll 3 ll

साज – श्रीजी को आज श्वेत छापा की रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को अमरसी छापा का, सुनहरी ज़री की तुईलैस की किनारी वाला सूथन और इसी प्रकार श्वेत छापा के वस्त्र पर रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी वाले खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. माणक के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर अमरसी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, सीधी चंद्रिका व लूम और तुर्री सुनहरी जरी की एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है. श्रीकर्ण में कर्णफूल के एक जोड़ी धराये जाते हैं.
 श्वेत रंग के पुष्पों की रंग-बिरंगी थागवाली दो सुन्दर मालाजी एवं कमल माला धरायी जाती है.
 श्रीहस्त में कमलछड़ी, स्याम मीना के वेणुजी और वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट सफ़ेद व गोटी मीना की आती है. 

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