व्रज - वैशाख कृष्ण चतुर्थी
Monday, 06 April 2026
लाल चुंदड़ी के चाकदार वागा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर सीधी चंद्रिका के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
नयनन लागी हो चटपटी l
मदनमोहन पिय नीकसे द्वार व्है, शोभित पाग लटपटी ll 1 ll
दूर जाय फीर चितयेरी मो तन, नयन कमल मनोहर भृकुटी l
'गोविंद' प्रभु पिय चलत ललित गति, कछुक सखा अपनी गटी ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में लाल चुंदड़ी की सुनहरी तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को लाल चुंदड़ी का सूथन, चोली एवं खुलेबंद के चाकदार वागा धराये जाते हैं. सभी वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं. ठाड़े वस्त्र फ़िरोज़ी रंग के धराये जाते हैं.
श्रृंगार – प्रभु को आज छेड़ान का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. पन्ना के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर लाल चुंदड़ी की छज्जेदार पाग पर सिरपैंच, सीधी चंद्रिका, रुपहली लूम,तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराया जाता है.
श्रीकर्ण में दो जोड़ी कर्ण फूल धराये जाते हैं.
श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
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