व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी
Friday, 26 June 2026
यमुना जल घट भर चलि चंद्रावली नारि ।
मारग में खेलत मिले घनश्याम मुरारि ।।१।।
नयनन सों नयना मिले मन हर लियो लुभाय ।
मोहन मूरति मन बसी पग धर्यो न जाय ।।२।।
स्नान को जल भरवे के भाव को श्रृंगार
चतुर्दशी के दिन स्नान यात्रा उत्सव होने से आज ज्येष्ठाभिषेक के लिए जल त्रयोदशी यानी शनिवार, 27 जून 2026 को भरा जाएगा
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
दुपहरी झनक भई तामें आये पिय मेरे मैं ऊठ कीनो आदर l
आँखे भर ले गई तनकी तपत सब ठौर ठौर बूंदन चमक ll 1 ll
रोम रोम सुख संतोष भयो गयो अनंग तनमें न रह्यो ननक l
मोहें मिल्यो अब ‘धोंधी’ के प्रभु मिट गई विरहकी जनक ll 2 ll
राजभोग दर्शन –
साज – आज श्रीजी में श्वेत जालीदार वस्त्र पर जल भरकर लाती गोपियों के सुन्दर काम से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर श्वेत बिछावट की गयी है.
वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित आड़बंद धराया जाता है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, श्वेत मोरपंख के कतरा (खंडेला) एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीं ऐसी ही दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.
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