व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी
Sunday, 21 June 2026
चंदनी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल फेटा के साज के श्रृंगार
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
आज धरी गिरधर पिय धोती
अति झीनी अरगजा भीनी पीतांबर घन दामिनी जोती ll 1 ll
टेढ़ी पाग भृकुटी छबि राजत श्याम अंग अद्भुत छबि छाई l
मुक्तामाल फूली वनराई, 'परमानंद' प्रभु सब सुखदाई ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में चंदनी रंग की मलमल की, रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी के हांशिया से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी रंग की मलमल का धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन श्रृंगार धराया जाता है. मोती के आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर श्वेत मलमल फेंटा के ऊपर बीच की चंद्रिका और कतरा धराये हैं.
श्रीकर्ण में लोलकबिंदी लड़ वाले कर्णफूल धराये जाते हैं.
पुष्पों की सुन्दर थागवाली दो कलात्मक मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, गंगा जमनी वाले वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
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