व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (रमा एकादशी व्रत)
Wednesday, 27 May 2026
चंदनी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर तुर्रा का श्रृंगार
आज के मनोरथ
राजभोग में चंदन की चोली कली के आभरण दानगढ़ मानगढ
शाम को आज नवनिकुंज अति शोभा
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : सारंग)
चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll
साज - आज श्रीजी में निकुंज के भाव की चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.
वस्त्र – आज श्रीजी को चंदन रंग की मलमल का पिछोड़ा एवं चंदन की चोली धराये है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छेड़ान का (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया है. मोती के आभरण धराये हैं.
श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग के ऊपर तुर्रा धराये हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये हैं. पुष्पों की कलात्मक थागवाली मालाजी धरायी हैं.
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