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Thursday, 4 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी Friday, 05 June 2026

व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी 
Friday, 05 June 2026

गुलाबी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर छज्जेदार पाग पर मोर चंद्रिका के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - अद्भुत डोल बनी 
शाम - फाग सवारी का मनोरथ, कली के श्रृंगार 
प्रियाजी में
प्रातः - अद्भुत डोल बनी का मनोरथ 
शाम - मोर कुटीर का मनोरथ 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग/बिलावल)

कमलमुख देखत कौन अघाय l
सुनरी सखी लोचन अलि मेरे मुदित रहे अरुझाय ll 1 ll
मुक्तामाल लाल ऊर ऊपर मानों फूली वनराय l
गोवर्धनधरके अंग अंग पर ‘कृष्णदास’ बलजाय ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में हाथी के ऊपर सवारी, पृष्ठभूमि में महल, व्रजभक्तों के साथ होली खेल आदि के चित्रांकन वाली सुन्दर पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज प्रभु को गुलाबी रंग की मलमल धोती एवं राजशाही पटका धराया जाता हैं. दोनों वस्त्र रुपहली ज़री की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित होते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की छज्जेदार पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, मोर चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट गोटी ऊष्णकाल के राग-रंग के आते हैं.

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