व्रज - विस २०८३ ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी
Saturday, 06 June 2026
चंदनी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर तुर्रा के श्रृंगार
श्रीजी में
प्रातः - छाक लिए श्याम बुलावत, चंदन की गोली
शाम - बृज ही में करत विहार , कली के श्रृंगार
प्रियाजी में
प्रातः - लीजे लालन अपनी छाक
शाम - फल की हटड़ी
आज प्रभु के श्रीअंगों (वक्षस्थल, दोनों श्रीहस्त और दोनों चरणकमल) में कुल पांच केशर बरास मिश्रित चंदन की गोलियां धरायी जाती है.
राजभोग दर्शन –
साज – (राग : सारंग)
चंदन को वागो पहिरे चंदन की खोर कीये, चंदन के रुखतरे ठाड़े पिय प्यारी l
चंदन की पाग शिर चंदन को फेंटा, बन्यो चंदन की चोली तन चंदन की सारी ll 1 ll
चंदन की आरसी ले निरखत दोऊ जन हंस हंस गिर जात भरत अंकवारी l
‘सूरदास’ मदन मोहन चंदभवनमें बैठे, गावत सारंग राग रंग रह्यो भारी ll 2 ll
साज – आज श्रीजी में छाक लीला के भाव की पिछवाई धरायी जाती है.
वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी मलमल का आड़बंद धराया जाता है.
श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
गुलाबी एवं श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में चार कमल की कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
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