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Wednesday, 10 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशीThursday, 11 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
Thursday, 11 June 2026

चंदनी मलमल के धोती पटका एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर तुर्रा के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - चाँदी का बंगला 
शाम को - आवत मोहन धेनु लिए 
प्रियाजी में
प्रातः - बिराजत सघन कुंज की ओट 
शाम को - गोरवर्धन ते आई गाय सब 

राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

भलेई मेरे आये हो पिय 
भलेई मेरे आये हो पिय ठीक दुपहरी की बिरियाँ l
शुभदिन शुभ नक्षत्र शुभ महूरत शुभपल छिन शुभ घरियाँ ll 1 ll
भयो है आनंद कंद मिट्यो विरह दुःख द्वंद चंदन घस अंगलेपन और पायन परियां l
'तानसेन' के प्रभु मया कीनी मों पर सुखी वेल करी हरियां ll 2 ll

साज - आज श्रीजी में गौचारण के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है.
गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की है.

वस्त्र – आज प्रभु को चंदनी रंग की मलमल धोती एवं पटका धराया जाता हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर चंदनी रंग के चिनमा पगा के ऊपर सिरपैंच, लूम, तुर्रा एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
 श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं एवं हमेल की भांति दो मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियाँ वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल के राग-रंग का एवं गोटी हक़ीक की आती हैं.

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