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Tuesday, 9 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी Wednesday, 10 June 2026

व्रज -विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण दशमी 
Wednesday, 10 June 2026

गुलाबी मलमल की परधनी एवं श्रीमस्तक पर पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - चंदन पहर नाव हरि बैठे 
प्रियाजी में
प्रातः - चंदन पत्ती मंडली का मनोरथ
शाम को - श्याम यमुना बीच खेवत नाव 

राजभोग दर्शन –

बैठै घनस्याम सुंदर खेवत है नाव।
आज सखी मोहन संग , खेलवे को दाव।।१।।
यमुना गम्भीर नीर, अति तरंग लोले। 
गोपिन प्रति कहन लागे, मीठे मृदु बोले।। २।। 
पथिक हम खेवट तुम , लीजिये उतराई। 
बीच धार मांझ रोकी , मिष ही मिष डुलाई ।। ३।। 
डरपत हों स्याम सुंदर, राखिये पद पास।
याहि मिष मिल्यो चाहे, परमानंद दास।।। ४।। 

साज – आज श्रीजी में उदयपुर के प्रसिद्द गणगौर-घाट, राजमहल, नौका-विहार, घूमर नृत्य करती गोपियों, श्री ठाकुर जी, श्री बलदेव जी एवं श्री नंद-यशोदा जी के सुन्दर चित्रांकन से सुशोभित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल की परदनी धरायी जाती है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. सर्व आभरण हीरा के धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी मलमल की छोर वाली पाग के ऊपर सिरपैंच, मोती की घुमावदार चमकानी गोल-चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
हरे एवं कमल के पुष्पों की विविध पुष्पों की थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है वहीँ श्वेत पुष्पों एवं कमल की दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, चांदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट उष्णकाल का व गोटी हकीक की आती है.

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