By Vaishnav, For Vaishnav

Friday, 6 March 2026

व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्थी

व्रज - चैत्र कृष्ण चतुर्थी
Saturday, 07 March 2026

मेघश्याम ज़री के घेरदार वागा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल बाक़ी चंद्रिका के श्रृंगार 

राजभोग दर्शन – 

कीर्तन – (राग : सारंग)

बैठे हरि राधासंग कुंजभवन अपने रंग
कर मुरली अधर धरे सारंग मुख गाई ll
मोहन अतिही सुजान परम चतुर गुननिधान
जान बुझ एक तान चूक के बजाई ll 1 ll
प्यारी जब गह्यो बीन सकल कला गुनप्रवीन
अति नवीन रूपसहित वही तान सुनाई ll
वल्लभ गिरिधरनलाल रिझ दई अंकमाल
कहत भलें भलें लाल सुन्दर सुखदाई ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में फ़िरोज़ी ज़री की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को मेघश्याम ज़री का सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. ठाडे वस्त्र पीले रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – आज प्रभु को हल्का श्रृंगार धराया जाता है. मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
 श्रीमस्तक पर मेघश्याम ज़री की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, गोल बाक़ी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
 गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
 श्रीहस्त में पुष्पछड़ी, चाँदी के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट मेघश्याम एवं गोटी चाँदी की आती है. 

संध्या-आरती दर्शन के उपरांत श्रीकंठ के आभरण बड़े कर छेड़ान के (छोटे) आभरण धराये जाते हैं. शयन दर्शन में श्रीमस्तक पर लूम-तुर्रा रूपहरी धराया जाता है.

No comments:

Post a Comment

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ शुक्ल नवमीWednesday, 22 July 2026

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ शुक्ल नवमी Wednesday, 22 July 2026  आज कछु कुंजनमें बरबासी । दलबादरमें देख सखीरी चमकत है चपलासी ।।१।। न्हेनी न्हेनी बूद...