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Monday, 1 June 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया Tuesday, 02 June 2026

व्रज - विस २०८३ अधिक ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया 
Tuesday, 02 June 2026

गुलाबी मलमल का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार 

श्रीजी में
प्रातः कुसुम गुलाब महल में बैठे
शाम को गुलाबी गणगौर का मनोरथ
प्रियाजी में
प्रातः केसरी बंगला/केसरी घटा का मनोरथ
शाम को केसरी गणगौर का मनोरथ
संध्या आरती दर्शन के बाद शीतल जल से स्नान 

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : सारंग)

तनक प्याय दे पानी याहि मिस गए वाके घर l
समझ बूझ के जल भर लाई पीवन लागे ओक ढीली करि
तब ग्वालिन मंद मंद मुसिकानी ll 1 ll
वेही जल वैसे ही गयो ओर जल भर लाई
तब ग्वालिन बोली मधुर सी बानी l
‘चतुरबिहारी’ प्यारे प्यासे हो तो पीजिये
नातर सिधारो रावरे जु प्यास मैं जानी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में गणगौर के भाव के चित्रांकन की पिछवाई धरायी है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर श्वेत बिछावट की है.

वस्त्र – आज श्रीजी को गुलाबी मलमल का आड़बंद धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर गुलाबी रंग की गोल पाग के  ऊपर सिरपैंच, गोल चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों एवं तुलसी की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं वहीँ दो मालाजी हमेल की भांति भी धरायी जाती है. 
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, गुलाबी मीना के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं. पट ऊष्णकाल का गोटी हक़ीक की छोटी आती है.

संध्या आरती दर्शन के बाद प्रभु को बरास वाले शीतल जल से स्नान कराया जाता है.
शयन की सखड़ी में शीतल सामग्रियां आरोगायी जाएगी.

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