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Wednesday, 1 July 2026

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ कृष्ण द्वितीयाThursday, 02 July 2026

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ कृष्ण द्वितीया
Thursday, 02 July 2026

चंदनी मलमल पर गुलाबी छापा का आड़बंद एवं श्रीमस्तक पर चिनमा पगा पर सीधी चंद्रिका चंद्रिका के श्रृंगार 

राजभोग दर्शन

कीर्तन – (राग : सारंग)

पनिया न जैहोरी आली नंदनंदन मेरी मटुकी झटकिके पटकी l
ठीक दुपहरीमें अटकी कुंजनमें कोऊ न जाने मेरे घटकी ll 1 ll
कहारी करो कछु बस नहि मेरो नागर नटसों अटकी l
‘नंददास’ प्रभुकी छबि निरखत सुधि न रही पनघटकी ll 2 ll

साज – आज श्रीजी में चंदनी रंग की मलमल की छापा की पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर सफ़ेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को चंदनी मलमल पर गुलाबी छापा का आड़बंद धराया जाता है.

श्रृंगार – आज प्रभु को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर चंदनी रंग की चिनमा पगा के ऊपर सिरपैंच, लूम, सीधी चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. 
श्रीकर्ण में मोती के एक जोड़ी कर्णफूल धराये जाते हैं.
 श्वेत पुष्पों की कलात्मक थागवाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, झीनें लहरियां के वेणुजी एवं एक वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का व गोटी हक़ीक की छोटी आती है.

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