By Vaishnav, For Vaishnav

Monday, 20 July 2026

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ शुक्ल अष्टमी Tuesday, 21 July 2026

व्रज – विस २०८३ आषाढ़ शुक्ल अष्टमी 
Tuesday, 21 July 2026

पीले मलमल पर आसमानी हाशियां का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर ग्वाल पगा पर पगा चंद्रिका के श्रृंगार 

राजभोग दर्शन – 

साज – (राग : मल्हार)

ढाँय ढाँय नाचत मोर सुन सुन नवधनकी घोर, बोलत है चहुँ और अति ही सुहावने। 
घुमड़त घनघटा निहार आगम सुख जाय विचार,
 चातक पिक मुदित गावत द्रुमन बैठे सुहावने ।।१।।
 नवल वनमें पहरे तन में कसुंभी चीर कनक वरण, श्याम सुभग ओढ़े वसन पीत सुहावने।
 पावस ऋतु को रंग बिलास दास चतुर्भुज प्रभु के संग, 
मोहित कोटि अनंग गिरिधर पिय अंग अंग अतिही सुहावने ।।२।।

साज - श्रीजी में आज श्री गिरिराज जी, श्री यमुना जी, वन एवं उसमे यथेच्छ विहार करते पशु-पक्षियों के चित्रकाम वाली पिछवाई धराई जाती है. गादी,  तकिया एवं चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र – आज श्रीजी को पीले मलमल पर आसमानी  हाशियाँ का पिछोड़ा धराया जाता है.

श्रृंगार – आज श्रीजी को छोटा (कमर तक) ऊष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. 
मोती के सर्व आभरण धराये जाते हैं. 
श्रीमस्तक पर पीले ग्वाल पगा के ऊपर सिरपैंच, लूम, पगा चंद्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में एक जोड़ी मोती के कर्णफूल धराये जाते हैं. 
श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में तीन कमल की कमलछड़ी, सुवा के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट ऊष्णकाल का एवं गोटी हक़ीक की आते हैं.

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व्रज – विस २०८३ आषाढ़ शुक्ल अष्टमी Tuesday, 21 July 2026

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